विस्तृत उत्तर
शांति पाठ (ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति:...) वेदों का एक अत्यंत कल्याणकारी और व्यापक मंत्र है। इसका वास्तविक अर्थ केवल व्यक्तिगत शांति नहीं है, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड और प्रकृति के हर कण में संतुलन स्थापित करने की प्रार्थना है।
इस मंत्र में साधक ईश्वर से प्रार्थना करता है कि—स्वर्ग लोक (द्यौ) में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी, जल, औषधियों और वनस्पतियों में शांति हो। सभी देवता शांत (अनुकूल) रहें, संपूर्ण ब्रह्म (ब्रह्मांड) में शांति हो, और वह शांति मुझे भी प्राप्त हो। यह मंत्र मनुष्य को प्रकृति के प्रति कृतज्ञ बनाता है और यह संदेश देता है कि जब तक हमारे आस-पास के वातावरण और तत्वों में शांति नहीं होगी, तब तक हमारे भीतर भी शांति स्थापित नहीं हो सकती।





