विस्तृत उत्तर
प्रकृति की साम्यावस्था में सत्त्व, रजस और तमस तीनों गुण संतुलन में रहते हैं। इस अवस्था में सृष्टि प्रकट नहीं होती।
प्रकृति की साम्यावस्था क्या होती है को संदर्भ सहित समझें
प्रकृति की साम्यावस्था क्या होती है का सबसे सीधा सार यह है: त्रिगुणों की संतुलित अप्रकट अवस्था।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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प्रकृति की साम्यावस्था क्या है?
तीनों गुणों का शांत संतुलन प्रकृति की साम्यावस्था कहलाता है।
भुवर्लोक में रहने वाले जीव पुनः पृथ्वी पर क्यों जन्म लेते हैं?
त्रिगुणात्मक बंधन, पुण्यों का क्षीण होना और गीता का यह वचन कि सभी लोक पुनरावर्ती हैं — इन कारणों से भुवर्लोक के जीव पुनः पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।
भुवर्लोक में रहने वाली आत्माओं की त्रिगुणात्मक स्थिति क्या होती है?
ऊपरी भुवर्लोक के सिद्धादि रजो-सात्त्विक हैं जबकि निचले भुवर्लोक के प्रेतादि तमोगुण प्रधान हैं। दोनों ही पूर्णतः सत्वगुणी न होने से मोक्ष नहीं पाते।
त्रिगुण सिद्धांत और अतल लोक का क्या संबंध है?
त्रिगुण सिद्धांत के अनुसार राजसिक-तामसिक अहंकार से ग्रस्त और भौतिक भोगों की तीव्र लालसा रखने वाले जीव अतल लोक जाते हैं। यह रजोगुण-तमोगुण का चरम फल है।
दुर्गा सप्तशती के तीन चरित और उनका त्रिगुणात्मक रहस्य क्या है?
प्रथम चरित: महाकाली (तमोगुण, काला) — मधु-कैटभ वध, अज्ञान-जड़ता का नाश। मध्यम चरित: महालक्ष्मी (रजोगुण, लाल) — महिषासुर वध, शौर्य-अहंकार शमन। उत्तर चरित: महासरस्वती (सत्त्वगुण, सफ़ेद) — शुंभ-निशुंभ-रक्तबीज वध, शुद्ध ज्ञान और मोक्ष।
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