विस्तृत उत्तर
कालसर्प शांति के लिए सर्प सूक्त सर्वाधिक प्रामाणिक और शक्तिशाली 'प्रमाण' है, क्योंकि यह सीधे कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता से उद्धृत है।
यह मंत्र किसी एक नाग को नहीं, अपितु ब्रह्मांड में व्याप्त समस्त सर्प-शक्तियों को नमस्कार और शांत करता है। यह 'नमो अस्तु सर्पेभ्यो...' से प्रारंभ होता है।
ऋग्वेद के खिल सूक्त में भी इस सूक्त का विस्तार मिलता है, जिसमें अजगर, कालिक और कर्कोटक जैसे विशिष्ट नागों का उल्लेख है, जो इसकी अति-प्राचीनता को सिद्ध करता है।





