विस्तृत उत्तर
संकल्प पूजा का प्राण है। यह 'काल, स्थान, गोत्र और उद्देश्य' की ब्रह्मांडीय घोषणा है।
हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्नलिखित विशिष्ट 'कालसर्प शांति संकल्प' का पाठ करें:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः... [जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे, अपने क्षेत्र, तिथि, वार, नक्षत्र का उच्चारण करें]... अमुक-गोत्रोत्पन्नः अमुक-नामा (अपना नाम) अहं, मम जन्म-कुण्डलिकायां कालसर्प-योगस्य (अमुक-नामकस्य) अशुभ-प्रभाव-निवारणार्थं... भगवान्-महाकाल-शिव-प्रीत्यर्थं तथा च नवनाग-देवता-प्रीत्यर्थं इमां संयुक्त-पूजाम् अहं करिष्ये।
यह कहकर हाथ का जल, पुष्प और अक्षत भूमि पर या एक पात्र में छोड़ दें।





