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पूजा विधि📜 गणेश पुराण — उपासना खंड, मुद्गल पुराण, स्कंद पुराण — गणेश खंड3 मिनट पठन

गणेश पूजा विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

गणेश पूजा में पंचामृत स्नान, सिंदूर, 21 दूर्वा, लाल पुष्प, जनेऊ अर्पण, 21 मोदक का भोग, 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप और आरती करें। पूजा में तुलसी वर्जित है। बुधवार और चतुर्थी तिथि सर्वश्रेष्ठ है।

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विस्तृत उत्तर

गणेश पूजा की शास्त्रोक्त विधि गणेश पुराण के उपासना खंड और मुद्गल पुराण में विस्तार से वर्णित है। गणेश जी सर्वप्रथम पूज्य देवता हैं — किसी भी कार्य, पूजा या अनुष्ठान से पूर्व इनकी पूजा की जाती है।

पूजा के शुभ समय

  • बुधवार — गणेश जी का विशेष दिन
  • चतुर्थी तिथि — गणेश जी की विशेष तिथि (मास में दो बार)
  • शुक्ल पक्ष चतुर्थी — विनायकी चतुर्थी
  • कृष्ण पक्ष चतुर्थी — संकष्टी चतुर्थी
  • भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी — गणेश चतुर्थी (महापर्व)

पूजा सामग्री

  • गणेश प्रतिमा (मिट्टी, पाषाण या धातु)
  • दूर्वा (दूब घास) — 21 दूर्वा (सर्वाधिक प्रिय)
  • लाल पुष्प — गुड़हल, गुलाब
  • मोदक या लड्डू (21)
  • पीत चंदन
  • सिंदूर
  • लाल वस्त्र
  • पंचामृत
  • जनेऊ
  • धूप, घी का दीप
  • नारियल
  • केला
  • पान, सुपारी

षोडशोपचार पूजन विधि

1आचमन और संकल्प

श्री गणेशाय नमः' — तीन बार बोलकर आचमन करें। मन में पूजा का उद्देश्य बोलें।

2गणेश जी का ध्यान

> शुक्लांबरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।

> प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशांतये॥

3आवाहन

'ॐ गं गणपतये नमः — आवाहयामि स्थापयामि'

4पंचामृत स्नान

दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से क्रमशः स्नान कराएं।

5जलाभिषेक

शुद्ध जल से स्नान।

6वस्त्र अर्पण

लाल वस्त्र या जनेऊ (यज्ञोपवीत) अर्पित करें। गणेश जी को जनेऊ अर्पण का विशेष महत्व है।

7सिंदूर लेपन

गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है — 'सिंदूरचर्चितं गौरम्'। सिंदूर का तिलक करें।

8पीत चंदन

पीत चंदन का लेपन करें।

9दूर्वा अर्पण (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)

21 दूर्वा की जोड़ियाँ (प्रत्येक जोड़ी में 3 पत्तियाँ) अर्पित करें।

> 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए प्रत्येक दूर्वा चढ़ाएं।

10पुष्प अर्पण

लाल गुड़हल, लाल गुलाब — 21 पुष्प।

11धूप-दीप

घी का दीप और सुगंधित धूप।

12नैवेद्य (भोग)

21 मोदक या लड्डू अर्पित करें — मोदक गणेश जी का सर्वप्रिय भोग है।

13ताम्बूल (पान)

सुपारी सहित पान अर्पण।

14परिक्रमा

तीन बार प्रदक्षिणा करें।

15मंत्र जप

ॐ गं गणपतये नमः' — 108 बार।

16गणेश आरती

'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा...'

17क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्...' — अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

विशेष नियम

  • गणेश पूजा में तुलसी वर्जित है (पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी और गणेश जी में शाप की कथा है)
  • गणेश जी को केतकी का फूल भी न चढ़ाएं
  • चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन वर्जित हैं
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शास्त्रीय स्रोत
गणेश पुराण — उपासना खंड, मुद्गल पुराण, स्कंद पुराण — गणेश खंड
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