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पूजा विधि📜 शिव पुराण - विद्येश्वर संहिता2 मिनट पठन

शिव पूजा की सही विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पूजा में स्नान के बाद षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है — पंचामृत अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, चंदन अर्पण, 'ॐ नमः शिवाय' जप और आरती। तुलसी व केतकी वर्जित हैं।

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विस्तृत उत्तर

शिव पूजा की सही विधि शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में विस्तार से वर्णित है। पूजा से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

पूजा विधि (क्रमशः)

  1. 1आचमन व संकल्प — पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें, तीन बार जल लेकर आचमन करें और संकल्प बोलें।
  1. 1गणपति पूजन — सर्वप्रथम श्री गणेश का स्मरण करें — 'वक्रतुण्ड महाकाय...'।
  1. 1शिवलिंग का शुद्धीकरण — शिवलिंग पर पहले जल से अभिषेक करें।
  1. 1षोडशोपचार पूजन:
  • आवाहन (शिव जी को आमंत्रण)
  • आसन (जल अर्पित करना)
  • पाद्य (चरण धोने हेतु जल)
  • अर्घ्य (हाथ धोने हेतु जल)
  • आचमनीय (मुख शुद्धि हेतु जल)
  • स्नान (पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से अभिषेक)
  • वस्त्र (श्वेत या पीत वस्त्र अर्पण)
  • यज्ञोपवीत (जनेऊ अर्पण)
  • गंध (चंदन लेपन)
  • पुष्प (बेलपत्र, धतूरा, आक, कनेर)
  • धूप (अगरबत्ती)
  • दीप (घृत दीप)
  • नैवेद्य (भोग — मीठा, फल)
  • आचमन
  • ताम्बूल (पान)
  • प्रदक्षिणा व नमस्कार
  1. 1मंत्र जप — 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें, न्यूनतम 108 बार।
  1. 1शिव आरती — अंत में आरती करें।

विशेष नियम: पूजा में तुलसी, केतकी का फूल और हल्दी वर्जित है। सोमवार को विशेष पूजा का महत्व है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण - विद्येश्वर संहिता
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