विस्तृत उत्तर
शिव जी की आरती पूजा का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण है।
आरती की विधि
- 1समय: पूजा के अंत में; सायंकाल आरती का विशेष महत्व है
- 1आरती पात्र: तांबे या पीतल की थाली में 5 बत्तियों का दीप (पंचमुखी दीप) या एकमुखी घी का दीप
- 1आरती करने की विधि:
- ▸आरती थाली को शिवलिंग के सामने ले जाएं
- ▸घड़ी की दिशा में (clockwise) धीरे-धीरे 7 बार घुमाएं
- ▸दीप, धूप, चमर, वस्त्र, पुष्प — क्रमशः पाँच प्रकार की आरती
- 1आरती गान:
'ओम जय शिव ओंकारा' (सर्वाधिक लोकप्रिय)
> ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
> ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
- 1शंख और घंटा: आरती के समय शंख बजाएं और घंटे की ध्वनि करें — इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
- 1आरती के बाद:
- ▸आरती की लौ को हाथों से स्पर्श करके आँखों पर लगाएं
- ▸प्रसाद ग्रहण करें
- ▸3 बार परिक्रमा करें (आधी परिक्रमा — जलहरी न लांघें)
ध्यान दें
- ▸आरती करते समय मन एकाग्र रखें
- ▸पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से आरती करें
- ▸आरती के दौरान पीठ शिव की ओर न हो





