विस्तृत उत्तर
काली पूजा की शास्त्रोक्त विधि कालिका पुराण और महाकाल संहिता में वर्णित है:
शुभ अवसर
- ▸दीपावली की रात्रि (काली पूजा — विशेषकर बंगाल में)
- ▸प्रत्येक अमावस्या की रात
- ▸श्यामा पूजा (शुक्ल पक्ष की अष्टमी)
- ▸नवरात्रि का सप्तमी-अष्टमी
- ▸कालरात्रि (नवरात्रि सप्तमी)
सामग्री
- ▸काली माँ की प्रतिमा (दक्षिणकाली — चार भुजा, सिंह पर खड़ी या शव पर)
- ▸सरसों या तिल के तेल का दीप (14 बत्ती या 1 बत्ती)
- ▸लाल गुड़हल — 108 फूल (यदि संभव हो)
- ▸नीले कमल
- ▸सिंदूर
- ▸नारियल
- ▸खीर या मिठाई
- ▸लाल चंदन
- ▸धूप
पूजा विधि (षोडशोपचार)
- 1आचमन व संकल्प: पूर्ण श्रद्धा के साथ संकल्प लें
- 1काली माँ का ध्यान:
> करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्।
> कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुंडमालाविभूषिताम्॥
> सद्यश्छिन्नशिरःखड्गवामाधोर्ध्वकराम्बुजाम्।
> अभयं वरदं दक्षाधोर्ध्वपाणिं च धारिणीम्॥
- 1आवाहन:
> ॐ क्रीं कालिकायै नमः — आवाहयामि, स्थापयामि
- 1पंचामृत स्नान: दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से स्नान
- 1वस्त्र अर्पण: लाल वस्त्र या चुनरी
- 1सिंदूर अर्पण: देवी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है
- 1पुष्प अर्पण: 108 लाल गुड़हल
- 1धूप-दीप: सरसों तेल का दीप
- 1नैवेद्य: खीर या नारियल का भोग
- 1मंत्र जप: 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' — 108 बार
- 1काली आरती:
> जय काली जय काली जय महाकाली माँ...
- 1प्रदक्षिणा: तीन बार परिक्रमा
- 1क्षमा प्रार्थना: अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें
दीपावली काली पूजा (बंगाली विधि)
बंगाल में दीपावली की रात्रि काली पूजा होती है — इसे 'श्यामा पूजा' भी कहते हैं। रात भर जागकर पूजा, ढाक की ध्वनि और भोग का विशेष महत्व है।





