विस्तृत उत्तर
शिव पुराण में शिवलिंग पूजा के श्रेष्ठ काल और तिथियों का विस्तृत वर्णन है:
दैनिक पूजा के श्रेष्ठ समय
- 1प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त — 4-6 बजे) — नित्य पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ
- 2मध्यान्ह (दोपहर 12 बजे) — विशेष पूजा
- 3प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे बाद) — अत्यंत शुभ; शिव इस समय प्रसन्न रहते हैं
- 4अर्धरात्रि (रात 12 बजे) — तांत्रिक साधना के लिए
साप्ताहिक विशेष दिन
- ▸सोमवार — शिव का प्रिय दिन; इस दिन पूजा का विशेष महत्व
मासिक शुभ तिथियां
- ▸त्रयोदशी (13वीं) — प्रदोष व्रत; शिव पूजा का सर्वोत्तम दिन
- ▸चतुर्दशी (14वीं) — शिवरात्रि व्रत
- ▸अमावस्या — पितृ तर्पण के साथ शिव पूजा
वार्षिक विशेष अवसर
- ▸महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) — सर्वोत्तम
- ▸सावन माह — पूरे माह विशेष पूजा
- ▸श्रावण सोमवार — अत्यंत पुण्यकारी
पूजा की अवधि
- ▸न्यूनतम: 15-20 मिनट
- ▸पूर्ण पूजा: 45 मिनट से 1 घंटा
वर्जित समय
- ▸सूतक (जन्म/मृत्यु अशौच) के दौरान पूजा न करें
- ▸अपवित्र अवस्था में पूजा न करें
- ▸क्रोध या विकल मन से पूजा न करें
शिव पुराण का वचन है — 'त्रिकाल पूजने तस्य मुक्तिर्भवति शाश्वती' — तीनों काल पूजन से मोक्ष प्राप्त होती है।





