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पूजा विधि📜 हनुमान पुराण, वाल्मीकि रामायण, स्कंद पुराण — वैष्णव खंड2 मिनट पठन

हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

हनुमान पूजा में: स्नान, लाल वस्त्र, सिंदूर लेपन, चमेली तेल का दीप, 21 लाल गुड़हल, गुड़-चना भोग, 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जप, हनुमान चालीसा पाठ और आरती करें। मंगलवार-शनिवार को सिंदूर का चोला अर्पण विशेष फलदायी है।

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विस्तृत उत्तर

हनुमान जी की पूजा हनुमान पुराण और वाल्मीकि रामायण की परंपरा पर आधारित है:

शुभ समय

  • मंगलवार और शनिवार — विशेष दिन
  • सूर्योदय और सूर्यास्त — प्रातः और सायंकाल
  • ब्रह्ममुहूर्त — गहन साधना के लिए
  • चैत्र पूर्णिमा — हनुमान जयंती (वार्षिक महापर्व)

पूजा सामग्री

  • हनुमान जी की मूर्ति/चित्र (सिंदूर-लिप्त)
  • सिंदूर (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)
  • चमेली के तेल का दीप
  • लाल गुड़हल के फूल
  • गुड़-चना (प्रसाद)
  • लाल वस्त्र या चोला
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • केला, नारियल
  • धूप-अगरबत्ती

पूजा विधि (क्रमशः)

1स्नान और तैयारी

स्नान करके लाल या नारंगी वस्त्र धारण करें।

2संकल्प

श्री हनुमत् प्रसाद प्राप्ति हेतु पूजन करता/करती हूँ।

3ध्यान श्लोक

> अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं

> दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।

> सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं

> रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

4सिंदूर लेपन (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)

हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर का लेपन करें — यह सर्वाधिक प्रिय है। 'सिंदूरतिलकं चारु लोचनं' — सिंदूर का तिलक लगाएं।

5चमेली के तेल का दीप

चमेली के तेल में बत्ती जलाएं — यह हनुमान जी का प्रिय दीप है।

6पुष्प

लाल गुड़हल के 21 फूल अर्पित करें।

7भोग

गुड़-चना और केले का भोग लगाएं।

8मंत्र जप

'ॐ हं हनुमते नमः' — 108 बार

9हनुमान चालीसा

एक बार पूर्ण पाठ।

10आरती

> जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

> जय कपीश तिहुँ लोक उजागर॥

11प्रदक्षिणा

तीन बार परिक्रमा करें।

12प्रसाद

गुड़-चना, केला और लड्डू का प्रसाद सभी में वितरित करें।

विशेष — सिंदूर चोला

मंगलवार और हनुमान जयंती पर हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर, तेल और केसर का लेप लगाकर 'चोला' चढ़ाने की परंपरा है — यह अत्यंत पुण्यकारी है।

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शास्त्रीय स्रोत
हनुमान पुराण, वाल्मीकि रामायण, स्कंद पुराण — वैष्णव खंड
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