विस्तृत उत्तर
हनुमान जी की पूजा हनुमान पुराण और वाल्मीकि रामायण की परंपरा पर आधारित है:
शुभ समय
- ▸मंगलवार और शनिवार — विशेष दिन
- ▸सूर्योदय और सूर्यास्त — प्रातः और सायंकाल
- ▸ब्रह्ममुहूर्त — गहन साधना के लिए
- ▸चैत्र पूर्णिमा — हनुमान जयंती (वार्षिक महापर्व)
पूजा सामग्री
- ▸हनुमान जी की मूर्ति/चित्र (सिंदूर-लिप्त)
- ▸सिंदूर (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)
- ▸चमेली के तेल का दीप
- ▸लाल गुड़हल के फूल
- ▸गुड़-चना (प्रसाद)
- ▸लाल वस्त्र या चोला
- ▸पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- ▸केला, नारियल
- ▸धूप-अगरबत्ती
पूजा विधि (क्रमशः)
1स्नान और तैयारी
स्नान करके लाल या नारंगी वस्त्र धारण करें।
2संकल्प
श्री हनुमत् प्रसाद प्राप्ति हेतु पूजन करता/करती हूँ।
3ध्यान श्लोक
> अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
> दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
> सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
> रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
4सिंदूर लेपन (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)
हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर का लेपन करें — यह सर्वाधिक प्रिय है। 'सिंदूरतिलकं चारु लोचनं' — सिंदूर का तिलक लगाएं।
5चमेली के तेल का दीप
चमेली के तेल में बत्ती जलाएं — यह हनुमान जी का प्रिय दीप है।
6पुष्प
लाल गुड़हल के 21 फूल अर्पित करें।
7भोग
गुड़-चना और केले का भोग लगाएं।
8मंत्र जप
'ॐ हं हनुमते नमः' — 108 बार
9हनुमान चालीसा
एक बार पूर्ण पाठ।
10आरती
> जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
> जय कपीश तिहुँ लोक उजागर॥
11प्रदक्षिणा
तीन बार परिक्रमा करें।
12प्रसाद
गुड़-चना, केला और लड्डू का प्रसाद सभी में वितरित करें।
विशेष — सिंदूर चोला
मंगलवार और हनुमान जयंती पर हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर, तेल और केसर का लेप लगाकर 'चोला' चढ़ाने की परंपरा है — यह अत्यंत पुण्यकारी है।





