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पूजा विधि📜 श्री सूक्त (ऋग्वेद परिशिष्ट), लक्ष्मी पुराण, स्कंद पुराण — वैष्णव खंड, विष्णु पुराण3 मिनट पठन

लक्ष्मी पूजन की सही विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी ध्यान, पंचामृत स्नान, पीत वस्त्र, सिंदूर-कुमकुम, कमल-गुलाब, श्री सूक्त पाठ, 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप और आरती करें। शुक्रवार प्रदोष काल में यह पूजा सर्वाधिक फलदायी है।

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विस्तृत उत्तर

लक्ष्मी पूजन की शास्त्रोक्त विधि श्री सूक्त, विष्णु पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से वर्णित है।

पूजा का शुभ समय

  • शुक्रवार — लक्ष्मी जी का विशेष दिन
  • दीपावली — वर्ष का सर्वोत्तम लक्ष्मी पूजन
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) — अत्यंत शुभ
  • पूर्णिमा — विशेष फलदायी

पूजा सामग्री

  • लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र (कमल पर विराजमान)
  • कमल के फूल (गुलाबी या श्वेत)
  • गुलाब, चमेली, मल्लिका
  • पीत चंदन
  • कुमकुम, सिंदूर
  • पीत वस्त्र या लाल चुनरी
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • खीर, मीठे पकवान
  • धूप, घी का दीप
  • सुपारी, पान
  • श्रीफल (नारियल)

षोडशोपचार पूजन विधि

1आचमन और संकल्प

तीन बार जल लेकर आचमन करें। संकल्प में श्री महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का उद्देश्य बोलें।

2देवी लक्ष्मी का ध्यान

> या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी।

> गंभीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया॥

> लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेंद्रैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुंभैः।

> नित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता॥

3आवाहन

'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः — आवाहयामि स्थापयामि'

4पंचामृत स्नान

दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से क्रमशः स्नान कराएं।

5जलाभिषेक

शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान।

6वस्त्र अर्पण

लाल या पीत चुनरी अर्पित करें।

7सिंदूर और कुमकुम

देवी को सिंदूर-कुमकुम लगाएं — यह सौभाग्य का प्रतीक है।

8गंध (चंदन)

पीत चंदन अर्पित करें।

9पुष्प अर्पण

कमल, गुलाब, बेला — श्वेत और गुलाबी फूल अर्पित करें।

10धूप और दीप

घी का दीप और सुगंधित धूप जलाएं।

11नैवेद्य (भोग)

खीर, मीठे पकवान, नारियल, मिठाई अर्पित करें।

12श्री सूक्त पाठ

> ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।

> चंद्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

(श्री सूक्त के 16 ऋचाओं का पाठ)

13मंत्र जप

'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — 108 बार

14लक्ष्मी आरती

'ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता...'

15प्रदक्षिणा

तीन बार परिक्रमा करें।

16क्षमा प्रार्थना

'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्...'

विशेष: पूजा में पवित्रता और श्रद्धा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है — लक्ष्मी जी भक्त के भाव को देखती हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
श्री सूक्त (ऋग्वेद परिशिष्ट), लक्ष्मी पुराण, स्कंद पुराण — वैष्णव खंड, विष्णु पुराण
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