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पूजा विधि📜 धर्म सिंधु — अर्घ्य विधि, नित्यकर्म पूजा प्रकाश1 मिनट पठन

पूजा में जल अर्पण कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

जल अर्पण विधि: तांबे के पात्र में जल + एक बूँद गंगाजल। दोनों हाथों से चरणों में अर्पित करते हुए 'इदं पाद्यं समर्पयामि'। सूर्य अर्घ्य: प्रातः पूर्व मुख, पतली धारा, गायत्री मंत्र। शालिग्राम पर पतली धारा — बहुत जल नहीं।

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विस्तृत उत्तर

जल अर्पण की विधि धर्म सिंधु और नित्यकर्म पूजा प्रकाश में वर्णित है:

1तांबे का पात्र

जल के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ। तांबे के पात्र में जल 8 घंटे रखने पर वह शुद्ध और औषधीय हो जाता है।

2गंगाजल मिलाएं

साधारण जल में एक बूँद गंगाजल मिलाने से वह गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है।

3विधि

  • दोनों हाथों में पात्र लें (या दाहिने हाथ में)
  • भगवान के चरणों में अर्पित करते हुए बोलें:

> 'ॐ [इष्ट देव नाम] इदं पाद्यं/अर्घ्यं/आचमनीयं समर्पयामि'

4सूर्य को अर्घ्य

प्रतिदिन प्रातः सूर्य को जल अर्पण:

  • तांबे के लोटे में जल
  • पूर्व दिशा में खड़े हों
  • जल की पतली धारा डालते हुए सूर्य के दर्शन
  • 'ॐ सूर्याय नमः' या गायत्री मंत्र

5शालिग्राम/लिंग पर

पतली धारा से — बहुत अधिक नहीं।

महत्व

जल अर्पण — जीवनदाता को जीवन का सबसे मूल्यवान तत्व अर्पित करना।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु — अर्घ्य विधि, नित्यकर्म पूजा प्रकाश
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