विस्तृत उत्तर
जल अर्पण की विधि धर्म सिंधु और नित्यकर्म पूजा प्रकाश में वर्णित है:
1तांबे का पात्र
जल के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ। तांबे के पात्र में जल 8 घंटे रखने पर वह शुद्ध और औषधीय हो जाता है।
2गंगाजल मिलाएं
साधारण जल में एक बूँद गंगाजल मिलाने से वह गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है।
3विधि
- ▸दोनों हाथों में पात्र लें (या दाहिने हाथ में)
- ▸भगवान के चरणों में अर्पित करते हुए बोलें:
> 'ॐ [इष्ट देव नाम] इदं पाद्यं/अर्घ्यं/आचमनीयं समर्पयामि'
4सूर्य को अर्घ्य
प्रतिदिन प्रातः सूर्य को जल अर्पण:
- ▸तांबे के लोटे में जल
- ▸पूर्व दिशा में खड़े हों
- ▸जल की पतली धारा डालते हुए सूर्य के दर्शन
- ▸'ॐ सूर्याय नमः' या गायत्री मंत्र
5शालिग्राम/लिंग पर
पतली धारा से — बहुत अधिक नहीं।
महत्व
जल अर्पण — जीवनदाता को जीवन का सबसे मूल्यवान तत्व अर्पित करना।





