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पूजा विधि📜 मनुस्मृति — आसन नियम, धर्म सिंधु, भगवद् गीता (6.11-12)2 मिनट पठन

पूजा में कौन सा आसन उपयोग करें?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा में आसन: कुश आसन — सर्वोत्तम (वैदिक परंपरा)। ऊनी आसन — सामान्य पूजा। लाल कपड़ा — शक्ति पूजा। काला कंबल — शिव/काली। भूमि पर सीधे न बैठें। एक ही आसन नित्य उपयोग करें — सिद्ध होता है। गीता 6.11: शुद्ध स्थान पर, स्थिर आसन।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में आसन का नियम मनुस्मृति, धर्म सिंधु और भगवद् गीता में वर्णित है:

भगवद् गीता (6.11-12) के अनुसार

> 'शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः।

> नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्।।'

— शुद्ध स्थान पर, न अधिक ऊँचा न अधिक नीचा, वस्त्र-चर्म-कुश के आसन पर बैठें।

पूजा के लिए उपयुक्त आसन

| आसन | उपयुक्तता |

|-----|------------|

| कुश आसन | सर्वोत्तम — वैदिक, सभी देवताओं के लिए |

| ऊनी आसन | सामान्य पूजा — सात्विक |

| लाल/पीत कपड़ा | शक्ति/विष्णु पूजा |

| काला कंबल | शिव/काली साधना |

| रेशम आसन | उत्तम — किंतु मँहगा |

वर्जित

  • भूमि पर सीधे बैठना
  • पत्थर या सीमेंट पर
  • धातु पर

आसन के नियम

  1. 1एक ही आसन नित्य उपयोग करें — सिद्ध होता है
  2. 2दूसरे इस पर न बैठें
  3. 3आसन को मोड़कर रखें
  4. 4आसन स्वच्छ हो

मनुस्मृति

कुशासनमुपासीत, धर्ममाचरन् नरः।' — धर्म का आचरण करते हुए कुश आसन पर बैठें।
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शास्त्रीय स्रोत
मनुस्मृति — आसन नियम, धर्म सिंधु, भगवद् गीता (6.11-12)
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