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पूजा विधि📜 शिव पुराण - रुद्र संहिता, लिंग पुराण2 मिनट पठन

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तांबे के लोटे से गंगाजल या शुद्ध जल, 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के साथ शिवलिंग पर धीमी धारा में अर्पित करें। जलहरी को न लांघें और शिवलिंग की आधी परिक्रमा (बाईं ओर) करें।

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विस्तृत उत्तर

शिव पुराण और लिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पण की विधि अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जल अर्पण के नियम

  1. 1जल का प्रकार: गंगाजल सर्वश्रेष्ठ है। इसके अभाव में स्वच्छ नदी जल, वर्षा जल या सामान्य शुद्ध जल उपयोग करें।
  1. 1पात्र: तांबे के लोटे से जल चढ़ाना शुभ है। लोहे का पात्र वर्जित है।
  1. 1दिशा: शिवलिंग के सामने (उत्तर या पूर्व दिशा) खड़े होकर जल अर्पित करें।
  1. 1धारा: जल की धारा निरंतर व मध्यम गति से चढ़ाएं — न अत्यधिक तेज, न बूंद-बूंद।
  1. 1मंत्र: जल अर्पण करते समय 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ जलधाराभिषेकेण शिवं प्रीणामि' बोलें।
  1. 1सोमवार विशेष: सोमवार को जलाभिषेक का विशेष महत्व है — इस दिन प्रातःकाल जल चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं।
  1. 1प्रतिबंध: शिवलिंग के सामने से (जलहरी के मुख की ओर से) जल न लांघें — यह अपवित्र माना जाता है।
  1. 1जलहरी का सम्मान: जल हमेशा जलहरी (योनिपीठ) के मुख की दिशा में बहना चाहिए — इसे न लांघें, बल्कि बाईं ओर से प्रदक्षिणा करें (आधी परिक्रमा)।

वैज्ञानिक महत्व: जलाभिषेक से शिवलिंग की ऊर्जा संतुलित रहती है और वातावरण शुद्ध होता है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण - रुद्र संहिता, लिंग पुराण
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