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पूजा विधि⏱ 3 मिनट पठन

घर में पूजा कैसे करें?

घर पूजा में: स्नान, स्वच्छ वस्त्र, पूजा स्थान सफाई, आचमन, संकल्प, गणेश वंदना, आवाहन, पंचोपचार (गंध-पुष्प-धूप-दीप-नैवेद्य), मंत्र जप, आरती, प्रदक्षिणा और क्षमा प्रार्थना करें।

संक्षिप्त उत्तर

घर पूजा में: स्नान, स्वच्छ वस्त्र, पूजा स्थान सफाई, आचमन, संकल्प, गणेश वंदना, आवाहन, पंचोपचार (गंध-पुष्प-धूप-दीप-नैवेद्य), मंत्र जप, आरती, प्रदक्षिणा और क्षमा प्रार्थना करें। श्रद्धा सर्वोपरि है।

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विस्तृत उत्तर

घर में पूजा की विधि गृह्यसूत्र, धर्म सिंधु और विष्णु पुराण में विस्तार से वर्णित है:

घर में पूजा के दो प्रकार

  1. 1नित्य पूजा — प्रतिदिन की सामान्य पूजा
  2. 2नैमित्तिक पूजा — व्रत, पर्व और विशेष अवसर पर

नित्य पूजा की पूर्व तैयारी

  1. 1ब्रह्ममुहूर्त में उठें — पूजा से पूर्व शौच, दंत-धावन और स्नान अनिवार्य है
  2. 2स्वच्छ वस्त्र — धुले हुए, सुथरे वस्त्र पहनें
  3. 3पूजा स्थान की सफाई — पूजा घर को साफ करें, बासी फूल और जल हटाएं
  4. 4आसन — बैठने के लिए आसन रखें

नित्य पूजा की क्रमिक विधि (धर्म सिंधु के अनुसार)

1आचमन

दाहिने हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें:

> 'ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः'

2संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर बोलें —

श्री गणेशाय नमः। आज [तिथि, वार, मास] मैं श्री [देवता] की कृपा प्राप्ति के लिए पूजन करता/करती हूँ।

3गणेश पूजन

कोई भी पूजा गणेश वंदना के बिना अधूरी है:

> 'वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।'

4देवता का आवाहन

'ॐ [देवता] आगच्छ, आगच्छ' — देवता को आमंत्रित करें

5पंचोपचार या षोडशोपचार

पंचोपचार (5 उपचार — नित्य पूजा के लिए)

  • ▸गंध (चंदन)
  • ▸पुष्प (फूल)
  • ▸धूप
  • ▸दीप
  • ▸नैवेद्य (भोग)

षोडशोपचार (16 उपचार — विशेष पूजा के लिए)

आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, आरती, प्रदक्षिणा, क्षमा

6मंत्र जप

अपने इष्टदेव का मंत्र 108 बार जपें।

7आरती

घी या तेल का दीप जलाकर आरती उतारें।

8प्रदक्षिणा

तीन बार परिक्रमा करें।

9क्षमा प्रार्थना

> 'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

> पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥'

10प्रसाद वितरण

भोग का प्रसाद परिवार में बाँटें।

घर पूजा का सार

विष्णु पुराण में कहा गया है — 'पूजा में श्रद्धा सर्वोपरि है।' जो हृदय से एक फूल भी चढ़ाता है, देव उससे प्रसन्न होते हैं।

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