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पूजा विधि📜 धर्म सिंधु, आगम शास्त्र — दीप विधान, अग्नि पुराण2 मिनट पठन

पूजा में दीपक कितने होने चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

दीपक की संख्या: नित्य पूजा में 1; आरती में पंचमुखी (5); विशेष पूजा में 5, 7 या 11 (विषम संख्या शुभ)। घी का दीपक सर्वश्रेष्ठ। दाहिनी ओर रखें। अग्नि पुराण: 'एक दीपक से भी मोक्ष निश्चित है।'

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विस्तृत उत्तर

दीपक की संख्या का वर्णन धर्म सिंधु और आगम शास्त्र में मिलता है:

दीपक की संख्या और महत्व

| संख्या | नाम | अवसर |

|--------|-----|-------|

| 1 | एकदीप | नित्य पूजा |

| 2 | द्विदीप | जोड़ी पूजा |

| 5 | पंचदीप | विशेष पूजा — पाँच तत्व |

| 7 | सप्तदीप | उत्सव पूजा |

| 11 | एकादश दीप | विशेष अनुष्ठान |

नित्य पूजा में

नित्य पूजा में एक दीपक पर्याप्त है।

आरती में

पंचमुखी (5 ज्वालाएं) दीपक आरती के लिए श्रेष्ठ है — पाँच तत्वों का प्रतीक।

दिशा

दीपक भगवान के सामने — दाहिनी ओर रखना उचित है।

सम संख्या वर्जित

शुभ अवसरों पर सम संख्या (2, 4, 6) में दीप वर्जित — विषम संख्या शुभ।

घी और तेल

  • घी का दीपक — सर्वश्रेष्ठ, सात्विक
  • तिल तेल — शनि और काली पूजा
  • सरसों तेल — भैरव और काली
  • एरंड तेल — शनि पूजा

अग्नि पुराण

एकेन दीपेन पूजायां मोक्षः स्यान्नात्र संशयः।' — एक दीपक से पूजा में भी मोक्ष निश्चित है।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु, आगम शास्त्र — दीप विधान, अग्नि पुराण
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