विस्तृत उत्तर
दीपक की संख्या का वर्णन धर्म सिंधु और आगम शास्त्र में मिलता है:
दीपक की संख्या और महत्व
| संख्या | नाम | अवसर |
|--------|-----|-------|
| 1 | एकदीप | नित्य पूजा |
| 2 | द्विदीप | जोड़ी पूजा |
| 5 | पंचदीप | विशेष पूजा — पाँच तत्व |
| 7 | सप्तदीप | उत्सव पूजा |
| 11 | एकादश दीप | विशेष अनुष्ठान |
नित्य पूजा में
नित्य पूजा में एक दीपक पर्याप्त है।
आरती में
पंचमुखी (5 ज्वालाएं) दीपक आरती के लिए श्रेष्ठ है — पाँच तत्वों का प्रतीक।
दिशा
दीपक भगवान के सामने — दाहिनी ओर रखना उचित है।
सम संख्या वर्जित
शुभ अवसरों पर सम संख्या (2, 4, 6) में दीप वर्जित — विषम संख्या शुभ।
घी और तेल
- ▸घी का दीपक — सर्वश्रेष्ठ, सात्विक
- ▸तिल तेल — शनि और काली पूजा
- ▸सरसों तेल — भैरव और काली
- ▸एरंड तेल — शनि पूजा
अग्नि पुराण
एकेन दीपेन पूजायां मोक्षः स्यान्नात्र संशयः।' — एक दीपक से पूजा में भी मोक्ष निश्चित है।





