विस्तृत उत्तर
पूजा में दिशा का नियम धर्म सिंधु और मनुस्मृति में वर्णित है:
सर्वोत्तम दिशाएं
1पूर्व मुख — सर्वोत्तम
सूर्य पूर्व से उगता है। पूर्व दिशा देव, ज्ञान और प्रकाश की दिशा है। सभी देवताओं की पूजा में पूर्व मुख सर्वश्रेष्ठ।
2उत्तर मुख
कुबेर (धन के देव) और ध्रुव की दिशा। धन और स्थिरता के लिए।
देवता अनुसार दिशा
| देवता | पूजक की दिशा |
|-------|-------------|
| विष्णु, सूर्य | पूर्व मुख |
| शिव | उत्तर या पूर्व |
| दुर्गा, काली | उत्तर या पूर्व |
| पितृ तर्पण | दक्षिण मुख |
वर्जित
- ▸दक्षिण मुख — यम की दिशा; देव पूजा में वर्जित
- ▸पश्चिम मुख — सामान्यतः उचित नहीं
व्यावहारिक नियम
यदि मंदिर की स्थिति ऐसी हो कि पूर्व या उत्तर मुख संभव न हो — तो जो दिशा संभव हो उसमें पूजा करें। भाव और श्रद्धा दिशा से अधिक महत्वपूर्ण है।
मनुस्मृति
देवपूजनकाले तु पूर्वाभिमुखः स्थितः।' — देव पूजा के समय पूर्व मुख होकर खड़े रहें।





