ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
पूजा विधि📜 धर्म सिंधु, विष्णु पुराण — प्रसाद ग्रहण विधि2 मिनट पठन

पूजा के बाद प्रसाद कैसे ग्रहण करें?

संक्षिप्त उत्तर

प्रसाद ग्रहण: दाएं हाथ से, बैठकर, सिर पर लगाएं फिर खाएं। भूमि पर न गिरने दें, अस्वीकार न करें। चरणामृत हथेली में लेकर पीएं। वितरण में सबको समान — कोई वंचित न हो।

📖

विस्तृत उत्तर

प्रसाद ग्रहण की विधि धर्म सिंधु और विष्णु पुराण में वर्णित है:

प्रसाद ग्रहण के नियम

  1. 1दाएं हाथ से ग्रहण करें — बाएं हाथ से प्रसाद लेना अशुभ
  2. 2खड़े होकर न लें — बैठकर ग्रहण करें (यदि संभव हो)
  3. 3सिर पर रखें — प्रसाद को पहले सिर पर लगाएं, फिर खाएं (विशेषतः श्री कृष्ण, विष्णु का)
  4. 4भूमि पर न गिरने दें — प्रसाद का अनादर नहीं
  5. 5अस्वीकार न करें — प्रसाद अस्वीकार करना भगवान का अपमान
  6. 6शुचि भाव से ग्रहण करें — विश्वास और श्रद्धा के साथ

प्रसाद वितरण का नियम

  • सबको समान भाव से वितरित करें
  • पहले बड़ों को, फिर बच्चों को
  • कोई वंचित न रहे

विशेष प्रसाद

  • चरणामृत — दाएं हाथ की हथेली में लेकर पीएं
  • पंचामृत — एक चम्मच पर्याप्त
  • भोग — थोड़ा भी पर्याप्त

धर्म सिंधु

प्रसादं भक्षयेत् शुद्धो भक्त्या देवप्रसादितम्।' — पवित्र होकर भक्तिपूर्वक देव का प्रसाद ग्रहण करें।
📜
शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु, विष्णु पुराण — प्रसाद ग्रहण विधि
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

प्रसाद ग्रहणविधिनियमदाएं हाथ

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

पूजा के बाद प्रसाद कैसे ग्रहण करें — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको पूजा विधि से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर धर्म सिंधु, विष्णु पुराण — प्रसाद ग्रहण विधि पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।