विस्तृत उत्तर
प्रसाद ग्रहण की विधि धर्म सिंधु और विष्णु पुराण में वर्णित है:
प्रसाद ग्रहण के नियम
- 1दाएं हाथ से ग्रहण करें — बाएं हाथ से प्रसाद लेना अशुभ
- 2खड़े होकर न लें — बैठकर ग्रहण करें (यदि संभव हो)
- 3सिर पर रखें — प्रसाद को पहले सिर पर लगाएं, फिर खाएं (विशेषतः श्री कृष्ण, विष्णु का)
- 4भूमि पर न गिरने दें — प्रसाद का अनादर नहीं
- 5अस्वीकार न करें — प्रसाद अस्वीकार करना भगवान का अपमान
- 6शुचि भाव से ग्रहण करें — विश्वास और श्रद्धा के साथ
प्रसाद वितरण का नियम
- ▸सबको समान भाव से वितरित करें
- ▸पहले बड़ों को, फिर बच्चों को
- ▸कोई वंचित न रहे
विशेष प्रसाद
- ▸चरणामृत — दाएं हाथ की हथेली में लेकर पीएं
- ▸पंचामृत — एक चम्मच पर्याप्त
- ▸भोग — थोड़ा भी पर्याप्त
धर्म सिंधु
प्रसादं भक्षयेत् शुद्धो भक्त्या देवप्रसादितम्।' — पवित्र होकर भक्तिपूर्वक देव का प्रसाद ग्रहण करें।





