विस्तृत उत्तर
कालसर्प के अनुसार 11, 21, या 108 संपुट का पाठ किया जाता है।
एक संपुट में: महामृत्युंजय मंत्र (पूर्ण पाठ) + सर्प सूक्त (तीनों श्लोक) + महामृत्युंजय मंत्र (पूर्ण पाठ) का क्रम शामिल है।
यह एक गहन ध्यान और जप की तांत्रिक विधि है जिसका पाठ साधक अपनी स्थिति और उद्देश्य के अनुसार करता है।





