विस्तृत उत्तर
प्रामाणिक 'शिव-नाग संयुक्त दिव्य मंत्र' कोई एक मंत्र नहीं, बल्कि दो महा-मंत्रों का 'संपुट' प्रयोग है:
कालसर्प दोष 'काल' (मृत्यु, भय, अस्थिरता) और 'सर्प' (बंधन, विष) का संयुक्त प्रभाव है।
- ▸काल का निवारण: 'काल' या 'मृत्यु' के निवारण हेतु भगवान शिव का 'महामृत्युंजय मंत्र' शास्त्रों में अचूक अस्त्र माना गया है।
- ▸सर्प का निवारण: 'सर्प' दोष के निवारण हेतु 'सर्प सूक्त' सर्वोच्च वैदिक अस्त्र है।
इन दो महा-मंत्रों का 'संपुट' (एक साथ प्रयोग) ही प्रामाणिक 'शिव-नाग संयुक्त दिव्य मंत्र' है।





