विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र असाध्य रोगों को दूर करने और अकाल मृत्यु को टालने का अचूक उपाय है। इसकी एक विशेष 'संपुट विधि' होती है जो इसे और भी शक्तिशाली बनाती है।
संपुट का प्रयोग — संपुट का अर्थ है मूल मंत्र के आगे और पीछे विशेष बीज अक्षरों को जोड़ना। सबसे शक्तिशाली रूप यह है: 'ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे... (मूल मंत्र)... माममृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ'।
ध्यान और विधि — जप करते समय यह मानसिक चित्र बनाना चाहिए कि भगवान शिव के मस्तक पर स्थित चंद्रमा से अमृत की बूंदें गिरकर रोगी के शरीर को स्नान करा रही हैं।
माला और दिशा — यह अनुष्ठान हमेशा रुद्राक्ष की माला से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही किया जाना चाहिए। पास में एक पात्र में जल भरकर रखना चाहिए जिसे बाद में प्रसाद रूप में ग्रहण किया जा सके।





