विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय और आगमिक परंपरा में, 'संयुक्त' का अर्थ प्रायः दो शक्तियों का 'संपुट' या संयोजन होता है।
संपुट प्रयोग इस प्रकार किया जाता है:
प्रयोग 1 (मानसिक जप हेतु): महामृत्युंजय मंत्र (पूर्ण पाठ) + सर्प सूक्त (तीनों श्लोक) + महामृत्युंजय मंत्र (पूर्ण पाठ) — इसे एक संपुट माना जाता है। कालसर्प के अनुसार 11, 21, या 108 संपुट का पाठ किया जाता है।
प्रयोग 2 (अभिषेक हेतु): रुद्राभिषेक करते समय, 'श्री रुद्रम्' के पाठ के उपरांत 'सर्प सूक्त' का सस्वर पाठ करते हुए शिवलिंग पर दुग्ध या जल से अभिषेक करना।





