विस्तृत उत्तर
कालसर्प दोष कुण्डली में राहु-केतु के बीच सभी ग्रहों के आने पर बनता है।
मंत्र जप द्वारा निवारण
- 1महामृत्युंजय मंत्र: 'ॐ त्र्यम्बकं...' — सवा लाख जप + दशांश हवन। सर्वाधिक प्रभावी।
- 2'ॐ नमः शिवाय': शिव जप — राहु-केतु शिव भक्ति से शांत।
- 3राहु मंत्र: 'ॐ रां राहवे नमः' — 18,000 जप।
- 4केतु मंत्र: 'ॐ कें केतवे नमः' — 17,000 जप।
- 5नाग गायत्री: 'ॐ नागकुलाय विद्महे...' — नाग देवता शांति।
- 6विष्णु सहस्रनाम: राहु-केतु = विष्णु के अंश (समुद्र मंथन) — विष्णु जप से शांत।
अन्य उपाय
- ▸त्र्यम्बकेश्वर (नासिक) या महाकाल (उज्जैन) में कालसर्प पूजा करवाना।
- ▸रुद्राभिषेक नियमित।
- ▸नाग पंचमी पर विशेष पूजा।
- ▸सर्प दोष शांति हवन।
ध्यान रखें: कालसर्प दोष का निर्णय कुण्डली विश्लेषण से ज्योतिषी करें — स्वयं निर्णय न लें।





