विस्तृत उत्तर
कालसर्प दोष = 12 प्रकार; राहु-केतु भाव स्थिति अनुसार:
| क्रम | नाम | राहु भाव | केतु भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | अनंत | 1 | 7 |
| 2 | कुलिक | 2 | 8 |
| 3 | वासुकि | 3 | 9 |
| 4 | शंखपाल | 4 | 10 |
| 5 | पद्म | 5 | 11 |
| 6 | महापद्म | 6 | 12 |
| 7 | तक्षक | 7 | 1 |
| 8 | कर्कोटक | 8 | 2 |
| 9 | शंखचूड़ | 9 | 3 |
| 10 | घातक | 10 | 4 |
| 11 | विषधर | 11 | 5 |
| 12 | शेषनाग | 12 | 6 |
प्रत्येक प्रकार = भिन्न प्रभाव। अनंत = विवाह; कुलिक = धन; वासुकि = भाई; शंखपाल = माता/संपत्ति; पद्म = संतान; तक्षक = शत्रु/पत्नी।
स्पष्टीकरण: कालसर्प = नवीन अवधारणा (Q696); प्राचीन ग्रंथों में नहीं। सभी = समान तीव्र नहीं।





