विस्तृत उत्तर
केतु = छाया ग्रह; वैराग्य/मोक्ष/अचानक घटना/पूर्वजन्म कर्म।
कुंडली में: केतु 1/2/4/7/8/12 भाव में अशुभ स्थिति; या शत्रु राशि; या अशुभ ग्रहों के साथ।
लक्षण
- 1अचानक अज्ञात समस्या — कारण समझ न आए।
- 2संतान कठिनाई/संतान से कष्ट।
- 3त्वचा रोग/रहस्यमय बीमारी।
- 4अत्यधिक वैराग्य/उदासीनता (बिना कारण)।
- 5कुत्ते से भय/कुत्ते काटना (केतु=कुत्ता संबंध)।
- 6दुर्घटना/अचानक हानि।
- 7आध्यात्मिक भटकाव/गलत गुरु।
पहचान: ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण = सटीक। लक्षण = संकेत मात्र।





