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प्रकार से जुड़े सभी प्रश्न(12)

प्रकार पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 12 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

आग्नेयास्त्र को 'अनलास्त्र' या 'अग्निबाण' भी क्यों कहते हैं?

आग्नेयास्त्र एक व्यापक श्रेणी का नाम है जिसके अंतर्गत अनलास्त्र और अग्निबाण जैसे विभिन्न अग्नि-आधारित अस्त्र आते हैं जिनकी क्षमताओं में भिन्नता हो सकती थी।

#आग्नेयास्त्र#अनलास्त्र#अग्निबाण
शिव पूजा सामग्री

शिव पूजा में धूप अगरबत्ती किस प्रकार की जलाएं?

चंदन सर्वश्रेष्ठ, गुगल सबसे शास्त्रीय, कपूर (कर्पूरगौरं), लोबान। केवड़ा वर्जित। प्राकृतिक > chemical। दीपक बाद, नैवेद्य पहले। शिवलिंग चारों ओर घुमाएं।

#धूप#अगरबत्ती#प्रकार
तंत्र ग्रंथ

तंत्र सार में कितने प्रकार की साधनाएं बताई गई हैं?

अभिनवगुप्त (काश्मीर शैव)। 4 उपाय: आणव (शारीरिक — मंत्र/प्राणायाम), शाक्त (मानसिक — ज्ञान/ध्यान), शाम्भव (इच्छा — संकल्प), अनुपाय (सहज — कुछ नहीं=ब्रह्म)। तंत्रालोक संक्षिप्त।

#तंत्र सार#प्रकार#साधना
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस प्रकार की आग में डाला जाता है?

नरक में अग्नि-प्रकार — रौरव (अग्निकुंड), कुंभीपाक (खौलता तेल), कालसूत्र (तप्त भूमि), तप्तलोहमय (तपता लोहा), तप्तकुंभ (खौलता बर्तन), सूलप्रोत (ज्वालाएँ)। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं।'

#नरक#आग#प्रकार
जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध के कितने प्रकार हैं?

गरुड़ पुराण में मुख्यतः षोडश (16) श्राद्ध बताए गए हैं — मलिनषोडशी, मध्यमषोडशी और उत्तमषोडशी। अन्य प्रकार हैं — नित्य, नैमित्तिक, काम्य, नांदी, पार्वण, एकोद्दिष्ट और सापिंडन श्राद्ध।

#श्राद्ध#प्रकार#षोडश श्राद्ध
जीवन एवं मृत्यु

दान के कितने प्रकार बताए गए हैं?

गरुड़ पुराण में 'अष्टमहादान' (गो, भूमि, स्वर्ण, अन्न, जल, वस्त्र, तिल, घट) प्रमुख हैं। गुण के अनुसार सात्विक, राजसिक, तामसिक भेद हैं। उद्देश्य के अनुसार प्रेत घट दान, गोदान, वृषोत्सर्ग अलग-अलग हैं।

#दान#प्रकार#अष्टमहादान
जीवन एवं मृत्यु

नरक के कितने प्रकार बताए गए हैं?

गरुड़ पुराण में 84 लाख नरकों का सामान्य उल्लेख है। 21 घोर नरक विशेष रूप से वर्णित हैं जिनमें तामिस्त्र, रौरव, कुंभीपाक, कालसूत्र, अवीचि प्रमुख हैं। 36 नरकों का वर्णन भी कुछ संदर्भों में मिलता है।

#नरक#प्रकार#84 लाख
तंत्र शास्त्र

तंत्र शास्त्र में दीक्षा कितने प्रकार की होती है?

प्रमुख: (1) क्रिया (बाह्य — होम/अभिषेक)। (2) चाक्षुषी (दृष्टि)। (3) स्पर्श (हाथ/मस्तक)। (4) शब्द/मंत्र (कान में — सर्वाधिक प्रचलित)। (5) ध्यान/मानसिक (सर्वसूक्ष्म)। (6) शक्तिपात (शक्ति प्रेषण — सर्वशक्तिमान)। (7) स्वप्न (दुर्लभ)। तंत्रसार: 'ज्ञान दे, पाप क्षीण करे = दीक्षा।'

#दीक्षा#प्रकार#तंत्र
ज्योतिष दोष एवं उपाय

कालसर्प दोष कितने प्रकार

12 प्रकार (राहु-केतु भाव): अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग। प्रत्येक=भिन्न प्रभाव। नवीन अवधारणा।

#कालसर्प#प्रकार#12
तंत्र प्रकार

तंत्र साधना के कितने प्रकार होते हैं?

तंत्र के प्रकार: दक्षिण मार्ग (सात्विक, प्रतीकात्मक — गृहस्थ के लिए), वाम मार्ग (पंचमकार साक्षात् — केवल दीक्षित के लिए), कौल मार्ग (दोनों का संयोग)। शाखाएं: शाक्त, शैव, वैष्णव, बौद्ध। कलियुग में दक्षिण मार्ग अनुशंसित।

#प्रकार#वाम मार्ग#दक्षिण मार्ग
ध्यान साधना

ध्यान के कितने प्रकार होते हैं?

ध्यान के मुख्य प्रकार हैं — सगुण (इष्टदेव का ध्यान), निर्गुण (निराकार ब्रह्म), ओम्-नाद ध्यान, सोऽहम् ध्यान (श्वास के साथ), त्राटक, विपश्यना, चक्र-ध्यान और मंत्र-ध्यान। गीता (12/2-5) में सगुण ध्यान को नए साधकों के लिए सरल और श्रेष्ठ बताया गया है।

#ध्यान#प्रकार#सगुण
तंत्र ज्ञान

तंत्र में मुद्रा कितने प्रकार की होती हैं?

3 प्रकार: हस्त (ज्ञान/चिन्/योनि), शरीर (हठ — महामुद्रा/खेचरी/बंध = 10), तांत्रिक (पूजा — 24/64)। पंचमकार 'मुद्रा' = अन्न/योगिक। हठ योग प्रदीपिका: 10 = कुंडलिनी।

#मुद्रा#प्रकार#तंत्र
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