विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान के अनेक प्रकारों का वर्णन है। विभिन्न संदर्भों में इन्हें अलग-अलग रूपों में वर्गीकृत किया गया है।
अष्टमहादान — गरुड़ पुराण में आठ महादानों का उल्लेख है जिन्हें 'अष्टमहादान' कहा जाता है। ये हैं — गोदान, भूमिदान, स्वर्णदान, अन्नदान, जलदान, वस्त्रदान, तिलदान और घटदान। इन्हें मृत्यु के समय और मृत्यु के बाद करना विशेष रूप से फलदायी बताया गया है।
गुण के अनुसार वर्गीकरण — श्रीमद्भगवद्गीता (जो गरुड़ पुराण के साथ अध्ययन की जाती है) में दान के तीन प्रकार बताए गए हैं — सात्विक दान (बिना स्वार्थ, उचित पात्र को), राजसिक दान (प्रतिफल की आशा से) और तामसिक दान (अपात्र को, अनुचित समय-स्थान पर)।
उद्देश्य के अनुसार — प्रेत-उद्धार के लिए प्रेत घट दान, पितर-तर्पण के लिए तर्पण-दान, वैतरणी पार के लिए गोदान, नरक-मुक्ति के लिए वृषोत्सर्ग।
गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में 'परम गोपनीय और दानों में उत्तम दान' के रूप में उस दान का वर्णन है जिससे मनुष्य, भूत-प्रेत और देवगण — तीनों संतुष्ट होते हैं।
संक्षेप में — गरुड़ पुराण में दान का विभाजन वस्तु, गुण, उद्देश्य और पात्र — इन चार आधारों पर किया गया है।





