विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरकों की संख्या के विषय में विभिन्न वर्णन मिलते हैं। मुख्य रूप से तीन आँकड़े शास्त्रों में मिलते हैं:
चौरासी लाख नरक — जिस प्रकार चौरासी लाख योनियाँ हैं, उसी प्रकार चौरासी लाख नरक भी हैं। यह व्यापक वर्णन है जो यह बताता है कि हर प्रकार के पाप के लिए एक विशेष नरक है।
21 घोर नरक — गरुड़ पुराण में 21 अत्यंत कठोर नरकों का विशेष उल्लेख मिलता है जिनमें प्रमुख हैं — तामिस्त्र, अंधतामिस्त्र, रौरव, महारौरव, कालसूत्र, कुंभीपाक, संजीवन, महापथ, अवीचि, संघात, लोहशंकु, शाल्मली, कुड्मल, पूतिमृत्तिक, लोहितोद, सविष, संप्रतापन, महानिरय, काकोल, तपन और संप्रतापन।
36 नरक — कुछ संस्करणों में 36 नरकों का वर्णन मिलता है जहाँ अलग-अलग पापों के लिए विशेष यातनाएँ बताई गई हैं।
गरुड़ पुराण का यह वर्णन प्रतीकात्मक भी माना जाता है — हर प्रकार के पाप का अलग परिणाम होता है और वह उस पाप के स्वभाव के अनुसार ही होता है।





