विस्तृत उत्तर
तंत्र के प्रकारों का वर्णन महानिर्वाण तंत्र और कुलार्णव तंत्र में विस्तार से मिलता है:
मुख्य वर्गीकरण
1दक्षिण मार्ग (दक्षिणाचार)
शुद्ध सात्विक साधना। पंचमकार का प्रतीकात्मक उपयोग:
- ▸मद्य → नारियल जल
- ▸मांस → अदरक
- ▸मत्स्य → पान
- ▸मुद्रा → अन्न
- ▸मैथुन → ध्यान
यह मार्ग गृहस्थ के लिए उचित और श्रेष्ठ है।
2वाम मार्ग (वामाचार)
पंचमकार का साक्षात् उपयोग। केवल विशेष दीक्षित गुरु-शिष्य के लिए। बिना योग्य गुरु के अत्यंत खतरनाक।
3मिश्र मार्ग (कौलाचार)
दोनों का संयोजन। उच्चतम कौल परंपरा।
शाखाओं के अनुसार
| शाखा | देवता | ग्रंथ |
|------|-------|-------|
| शाक्त तंत्र | देवी/काली/दुर्गा | शक्ति संगम तंत्र |
| शैव तंत्र | शिव/भैरव | तंत्रालोक |
| वैष्णव तंत्र | विष्णु | पांचरात्र आगम |
| बौद्ध तंत्र | वज्रयान देवता | वज्रयान |
महानिर्वाण तंत्र
कलियुग में दक्षिण मार्ग ही उचित है — वाम मार्ग केवल अति उन्नत साधकों के लिए।





