विस्तृत उत्तर
## ध्यान के कितने प्रकार होते हैं?
शास्त्रों में ध्यान के मुख्य प्रकार
### 1. सगुण ध्यान (साकार ध्यान)
ईश्वर के किसी विशेष रूप — श्रीकृष्ण, राम, शिव, दुर्गा, गणेश — का हृदय में स्पष्ट मानसिक चित्रण।
- ▸विधि: आँखें बंद करके इष्टदेव के दिव्य रूप, मुस्कान, वस्त्र, आभूषण का भाव करें
- ▸उपयुक्त: भक्तिमार्गी साधकों के लिए
- ▸गीता (12/2): भगवान कहते हैं — मन मुझमें लगाने वाले नित्ययुक्त योगी सर्वोत्तम हैं
### 2. निर्गुण ध्यान (निराकार ध्यान)
निराकार, गुणातीत ब्रह्म पर ध्यान। 'मैं शुद्ध चेतना हूँ' — इस भाव में स्थिरता।
- ▸उपयुक्त: ज्ञानमार्गी और उन्नत साधकों के लिए
- ▸गीता (12/5) — यह मार्ग कठिन है; देहधारियों के लिए सगुण सरल है
### 3. ओम्-ध्यान / नाद-ध्यान
ओम् का मन में उच्चारण करते हुए उसकी आंतरिक गूँज पर ध्यान। माण्डूक्योपनिषद में विस्तृत।
### 4. सोऽहम् ध्यान / अजपा-जप
श्वास लेते 'सो', छोड़ते 'हम्'। प्रतिदिन 21,600 बार स्वाभाविक रूप से होता है। यह सबसे सरल और शक्तिशाली ध्यान है।
### 5. त्राटक ध्यान
किसी दीपशिखा, बिंदु या मूर्ति पर बिना पलक झपकाए एकटक देखना। दृष्टि-एकाग्रता और आज्ञाचक्र जागृति के लिए।
### 6. विपश्यना ध्यान
शरीर की संवेदनाओं और श्वास पर साक्षी-भाव से ध्यान। बौद्ध परंपरा का — किंतु वैदिक साक्षी-भाव से मेल खाता है।
### 7. प्राणायाम-ध्यान
प्राणायाम के दौरान प्राण की गति पर ध्यान — कुंभक में ध्यान विशेष गहरा होता है।
### 8. चक्र-ध्यान
मूलाधार से सहस्रार तक सात चक्रों पर क्रमशः ध्यान। तंत्र और कुंडलिनी-योग में प्रचलित।
### 9. मंत्र-ध्यान
किसी विशेष मंत्र — ओम् नमः शिवाय, हरे राम आदि — का मानसिक जप करते हुए ध्यान।





