विस्तृत उत्तर
गौमुखी (गोमुखी) एक कपड़े की थैली होती है जिसमें माला रखकर जप किया जाता है। इसका आकार गाय के मुख (गोमुख) के समान होता है, इसलिए इसे 'गोमुखी' कहते हैं।
गोमुखी प्रयोग के कारण
1जप की गोपनीयता
मंत्र शास्त्र का प्रमुख नियम है कि जप गोपनीय रखना चाहिए। यदि माला पर जप करते समय किसी की दृष्टि पड़ जाए तो जप का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। गोमुखी में माला और हाथ दोनों ढके रहते हैं।
2तर्जनी अंगुली का स्वतः बचाव
गोमुखी की बनावट ऐसी होती है कि तर्जनी अंगुली स्वतः ही बाहर निकली रहती है और माला का स्पर्श नहीं करती, जो शास्त्रीय नियम का पालन सुनिश्चित करती है।
3माला की शुद्धता
गोमुखी में माला बाहरी अशुद्धियों (धूल, पसीना, कीटाणु) से सुरक्षित रहती है।
4मन की एकाग्रता
गोमुखी में हाथ और माला ढकी होने से बाहरी विक्षेप कम होते हैं और ध्यान केंद्रित रहता है।
5साधना शक्ति संरक्षण
मान्यता है कि जप से उत्पन्न आध्यात्मिक ऊर्जा गोमुखी में संरक्षित रहती है और बाहर विलीन नहीं होती।
गोमुखी के नियम
- ▸गोमुखी ऊनी या सूती कपड़े की होनी चाहिए।
- ▸इसे सदा स्वच्छ रखें।
- ▸जप के अतिरिक्त अन्य प्रयोग न करें।
- ▸गोमुखी को पवित्र स्थान पर रखें।
विशेष: सामूहिक जप (जैसे अनुष्ठान, सत्संग) में गोमुखी का महत्व और भी अधिक है क्योंकि अनेक लोग एक साथ जप करते हैं और दृष्टि दोष की संभावना बढ़ जाती है।





