विस्तृत उत्तर
नागबलि पूजा एक अत्यन्त विशिष्ट और दुर्लभ अनुष्ठान है जो मुख्यतः सर्प दोष (कालसर्प दोष), नाग दोष, और पितृ दोष निवारण के लिए किया जाता है।
कहाँ करवाएँ
नागबलि पूजा का सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक स्थान त्र्यम्बकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र) है — यह ज्योतिर्लिंग स्थल है जहाँ यह पूजा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न होती है। कुछ अन्य स्थान: रामेश्वरम्, श्रीशैलम्, कुक्के सुब्रह्मण्य (कर्नाटक)।
कब करवाएँ
- ▸श्रावण मास (सावन) सर्वोत्तम — नागपंचमी के आसपास।
- ▸अमावस्या, पूर्णिमा, या शुभ मुहूर्त पर।
- ▸ग्रहण काल में भी शुभ माना जाता है।
विधि (संक्षिप्त)
- 1संकल्प — यजमान अपना नाम, गोत्र, और उद्देश्य बताकर संकल्प करे।
- 2गणपति पूजन।
- 3कलश स्थापना और नवग्रह पूजन।
- 4नाग प्रतिमा (सोने/चाँदी की) की स्थापना और पूजन।
- 5विशिष्ट मंत्रों से नाग देवता का आह्वान।
- 6हवन — सर्प सूक्त और अन्य विशिष्ट मंत्रों से।
- 7पिण्डदान — सर्प योनि में गए पूर्वजों की मुक्ति हेतु।
- 8बलि — प्रतीकात्मक (आटे की मूर्ति)।
- 9नाग प्रतिमा का विसर्जन।
- 10ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा।
कौन करवाएँ
- ▸कालसर्प दोष वाले।
- ▸सर्प हत्या का पाप लगा हो।
- ▸सन्तान प्राप्ति में बाधा।
- ▸अकारण भय, दुःस्वप्न, चर्मरोग।
- ▸पितृ दोष।
ध्यान रखें: यह अत्यन्त विशिष्ट अनुष्ठान है — केवल अनुभवी और शास्त्रज्ञ पुरोहित से ही करवाएँ। त्र्यम्बकेश्वर में सरकार द्वारा अधिकृत पुरोहितों से ही करवाना उचित है।





