विस्तृत उत्तर
वैदिक-रुद्र संपुट सबसे प्रामाणिक 'शिव-नाग संयुक्त' वैदिक अनुष्ठान है।
कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता में 'श्री रुद्रम्' (चमकम्-नमकम्) और 'सर्प सूक्त' दोनों एक ही संहिता में स्थित हैं, जो इनके गहरे आंतरिक संबंध को दर्शाता है।
विधि: रुद्राभिषेक करते समय, 'श्री रुद्रम्' के पाठ के उपरांत 'सर्प सूक्त' का सस्वर पाठ करते हुए शिवलिंग पर दुग्ध या जल से अभिषेक करना ही सबसे प्रामाणिक 'शिव-नाग संयुक्त' वैदिक प्रयोग है।





