विस्तृत उत्तर
मंदिर में अभिषेक (देवता की मूर्ति/शिवलिंग पर विभिन्न द्रव्यों से स्नान) में अनेक प्रकार के पवित्र द्रव्य प्रयोग किए जाते हैं।
प्रमुख अभिषेक द्रव्य
1पंचामृत (पाँच अमृत — सर्वाधिक प्रचलित)
- ▸दूध (गो-दुग्ध)
- ▸दही (गो-दधि)
- ▸घी (गो-घृत)
- ▸मधु (शहद)
- ▸शर्करा (शक्कर/मिश्री)
2जल-आधारित
- ▸शुद्ध जल (सादा पानी)
- ▸गंगाजल (सर्वोत्तम)
- ▸नारियल जल (नारिकेल जल)
- ▸गन्ने का रस (इक्षु रस)
- ▸चंदन जल (चंदन मिश्रित)
- ▸गुलाब जल
- ▸कुश (दर्भ) जल
- ▸तुलसी जल (विष्णु)
3तैलीय/स्निग्ध
- ▸तिल तेल (शनि शान्ति विशेष)
- ▸सरसों तेल (कुछ परम्पराओं में)
- ▸गो-घृत (घी)
4चूर्ण/पाउडर
- ▸चंदन चूर्ण (श्वेत/लाल)
- ▸हल्दी
- ▸कुंकुम/सिंदूर (देवी/गणेश — शिवलिंग पर प्रायः नहीं)
- ▸विभूति/भस्म (शिव विशेष)
- ▸कपूर
5अन्न/धान्य
- ▸अक्षत (चावल)
- ▸तिल
- ▸जौ
6विशेष (108 द्रव्य रुद्राभिषेक)
रुद्राभिषेक में 108 पवित्र द्रव्यों से अभिषेक होता है:
- ▸उपरोक्त सभी + नीम जल, बेल जल, आम पत्र जल
- ▸केसर जल, इलायची जल, लौंग जल
- ▸पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर)
- ▸विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों का काढ़ा
- ▸विभिन्न फलों का रस
अभिषेक का क्रम (सामान्य)
शुद्ध जल → दूध → दही → घी → शहद → शक्कर → पंचामृत → चंदन जल → गंगाजल (अन्तिम)
देवता-विशिष्ट द्रव्य
- ▸शिव: जल (प्रधान), दूध, बिल्व रस, भांग (कुछ परम्पराओं में)
- ▸विष्णु: पंचामृत, तुलसी जल, चंदन
- ▸देवी: कुंकुम जल, हल्दी जल, गुलाब जल
- ▸गणेश: मोदक + पंचामृत, दूर्वा जल
अभिषेक जल (चरणामृत) का महत्व
अभिषेक के बाद बहने वाला जल = 'चरणामृत' — अत्यन्त पवित्र। इसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें। व्यर्थ न बहाएँ।





