विस्तृत उत्तर
मंदिर में देवता की दिनचर्या उसी प्रकार निर्धारित होती है जैसे किसी राजा या गृहस्थ की — क्योंकि देवता = सगुण रूप में जीवित व्यक्ति।
देवता दिनचर्या (सामान्य — बड़े मंदिरों में)
1सुप्रभातम् / जागरण (ब्रह्म मुहूर्त — ~4:30-5:00 AM)
- ▸गर्भगृह के पट खोलना
- ▸सुप्रभात गीत/स्तोत्र — 'कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते' (विष्णु)
- ▸देवता को 'जगाना'
- ▸दीपक प्रज्वलित
2स्नान / अभिषेक (~5:30-6:30 AM)
- ▸मूर्ति को जल/पंचामृत से स्नान
- ▸विभूति/चंदन/कुंकुम लेपन
- ▸तेल लेपन (कुछ परम्पराओं में)
3अलंकार / श्रृंगार (~6:30-7:30 AM)
- ▸नवीन वस्त्र पहनाना
- ▸आभूषण सजाना
- ▸पुष्प माला, हार
- ▸मुकुट/किरीट धारण
4बाल भोग / प्रातः भोग (~7:30-8:00 AM)
- ▸प्रातःकालीन भोग — दूध, मिठाई, फल
- ▸पंचामृत
5प्रातः दर्शन / दर्शनम् (~8:00 AM)
- ▸भक्तों के लिए प्रथम दर्शन खुलता है
- ▸प्रातः आरती
6मध्याह्न भोग / राजभोग (~12:00 PM)
- ▸दिन का मुख्य भोग — सम्पूर्ण भोजन
- ▸'राजभोग' कहलाता है — राजा का भोजन
7मध्याह्न विश्राम / सयन (~12:30-3:00 PM)
- ▸कुछ मंदिरों में दोपहर को पट बंद — देवता विश्राम
- ▸भक्तों के लिए दर्शन बंद
8सायंकालीन दर्शन (~3:00-4:00 PM)
- ▸पट पुनः खुलना
- ▸सायं भोग — फल, मिठाई
9संध्या आरती / दीपाराधना (~6:00-7:00 PM)
- ▸संध्या आरती — दीपक, कर्पूर
- ▸मुख्य संध्या दर्शन — सर्वाधिक भक्त
10शयन भोग / शयन आरती (~9:00-10:00 PM)
- ▸रात्रि भोग — दूध, पान
- ▸शयन आरती
- ▸देवता को शय्या पर विराजित (कुछ मंदिरों में)
- ▸पट बंद — अगले प्रातः तक
आगम शास्त्र में
इसे 'षोडश उपचार' (16 सेवाएँ) या 'अष्टकाल पूजा' (8 बार पूजा) कहते हैं। प्रत्येक सेवा = देवता की एक दैनिक आवश्यकता — जागरण, स्नान, भोजन, विश्राम, शयन।
क्यों
- ▸देवता = सगुण रूप — उन्हें भी मनुष्य जैसी सेवा
- ▸यह भक्ति का सर्वोच्च रूप — 'मेरे भगवान को मेरी सेवा चाहिए'
- ▸नित्य पूजा = मंदिर का प्राण — एक दिन भी न छूटे
मंदिर अनुसार भिन्नता
प्रत्येक मंदिर की अपनी नित्य सेवा — TTD (तिरुपति), जगन्नाथ (पुरी), वैष्णो देवी — सभी में भिन्न क्रम और समय।





