विस्तृत उत्तर
सहस्रनाम अर्चना = देवता के 1000 नामों का पाठ करते हुए प्रत्येक नाम पर पुष्प या पवित्र सामग्री अर्पित करना। यह अर्चना की सर्वोत्कृष्ट विधि है।
प्रमुख सहस्रनाम
- ▸विष्णु सहस्रनाम — महाभारत (अनुशासन पर्व), भीष्म ने युधिष्ठिर को बताया
- ▸ललिता सहस्रनाम — ब्रह्माण्ड पुराण, देवी त्रिपुरसुन्दरी के 1000 नाम
- ▸शिव सहस्रनाम — शिवपुराण, भगवान शिव के 1000 नाम
- ▸लक्ष्मी सहस्रनाम, गणेश सहस्रनाम आदि
मंदिर में सहस्रनाम अर्चना कैसे करवाएं
1पूर्व तैयारी
- ▸मंदिर प्रशासन/पुजारी से बात करें
- ▸सहस्रनाम अर्चना का शुल्क/दक्षिणा जानें
- ▸शुभ दिन/मुहूर्त निश्चित करें (एकादशी, पूर्णिमा, नवरात्रि विशेष)
- ▸1000 पुष्प (कमल, गुलाब, चमेली) या अक्षत (चावल) की व्यवस्था
2सामग्री
- ▸1000+ पुष्प या अक्षत
- ▸कुंकुम, हल्दी, चंदन
- ▸अगरबत्ती, दीपक, कर्पूर
- ▸नैवेद्य (भोग — मिठाई, फल)
- ▸दक्षिणा
3विधि
- ▸संकल्प — भक्त का नाम, गोत्र, नक्षत्र, कामना बताकर संकल्प
- ▸गणपति पूजन (प्रारम्भ)
- ▸सहस्रनाम पाठ — पुजारी (या भक्त स्वयं) प्रत्येक नाम बोलकर पुष्प अर्पित
- ▸विधि: 'ॐ [नाम] नमः' + पुष्प → 1000 बार
- ▸पूर्णाहुति — अंत में कर्पूर आरती
- ▸प्रसाद वितरण
4समय
सहस्रनाम अर्चना में 1.5 से 3 घंटे लग सकते हैं (गति अनुसार)।
5स्वयं भी कर सकते हैं
- ▸घर पर सहस्रनाम पुस्तक से स्वयं पाठ कर सकते हैं
- ▸प्रत्येक नाम पर पुष्प/अक्षत देवता को अर्पित
- ▸यदि 1000 पुष्प न हों — अक्षत (चावल) से भी कर सकते हैं
फल (शास्त्रीय)
- ▸विष्णु सहस्रनाम: सर्वपाप नाश, मोक्ष, सर्वमनोकामना पूर्ति
- ▸ललिता सहस्रनाम: शक्ति प्राप्ति, सौभाग्य, विद्या
- ▸शिव सहस्रनाम: रोग नाश, दीर्घायु, शिव कृपा





