विस्तृत उत्तर
मंदिर में अभिषेक हिन्दू पूजा की एक प्रमुख विधि है जिसमें देवता की मूर्ति या शिवलिंग पर विभिन्न पवित्र द्रव्यों से स्नान कराया जाता है।
अभिषेक के सामान्य नियम
1शारीरिक शुद्धि
- ▸अभिषेक से पूर्व स्नान अनिवार्य
- ▸स्वच्छ वस्त्र धारण करें (धोती-दुपट्टा उत्तम, सिला हुआ वस्त्र भी स्वीकार्य)
- ▸चर्म रोग, बुखार, सर्दी-जुकाम, या रक्तस्राव की स्थिति में अभिषेक न करें
2शुभ मुहूर्त
- ▸प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक) सर्वश्रेष्ठ
- ▸सोमवार, प्रदोष काल, शिवरात्रि — शिव अभिषेक के लिए विशेष शुभ
- ▸शुक्ल पक्ष — सामान्यतः अधिक शुभ
3दिशा नियम (शिवलिंग अभिषेक)
- ▸शिवलिंग पर जल उत्तर दिशा की ओर से गिरना चाहिए
- ▸अभिषेक करने वाले का मुख दक्षिण दिशा में होना चाहिए
- ▸पूर्व दिशा से जल न चढ़ाएं (शिव का मुख्य द्वार माना जाता है)
4अभिषेक द्रव्य (क्रम)
शुद्ध जल/गंगाजल → दूध → दही → घी → मधु (शहद) → शक्कर → पंचामृत → चंदन जल → गंगाजल (अन्तिम स्नान)
5अभिषेक के दौरान
- ▸'ॐ नमः शिवाय' या रुद्र मंत्र का जप करें
- ▸मंत्र जप के बिना अभिषेक अपूर्ण माना जाता है
- ▸एकाग्र मन से करें — बातचीत न करें
6अभिषेक के पश्चात
- ▸बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, शमी पत्ते अर्पित करें
- ▸धूप-दीप जलाएं और आरती करें
- ▸भोग (नैवेद्य) अर्पित करें
- ▸दक्षिणा/दान दें
7विशिष्ट अभिषेक प्रकार
- ▸जलाभिषेक — शुद्ध जल/गंगाजल (सरलतम)
- ▸पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- ▸रुद्राभिषेक — 108 पवित्र द्रव्यों से, रुद्र मंत्रोच्चार के साथ
- ▸महारुद्राभिषेक — 11 पंडित, 11 कलश — अत्यन्त विस्तृत
सावधानियाँ
- ▸शिवलिंग पर तुलसी और केतकी के पुष्प वर्जित (शिवपुराण)
- ▸शिवलिंग पर कुंकुम/सिंदूर न लगाएं (कुछ परम्पराओं में अपवाद)
- ▸अभिषेक जल (चरणामृत) को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें — फेंकें नहीं
- ▸मंदिर के पुजारी के निर्देशानुसार ही अभिषेक करें





