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मंदिर नियम⏱ 2 मिनट पठन

मंदिर में भगवान की मूर्ति को छूना चाहिए या नहीं?

गर्भगृह: सामान्य भक्त स्पर्श वर्जित — केवल दीक्षित पुजारी। कारण: चैतन्य शक्ति, पवित्रता, क्षति-रक्षा। अनुमति: चरण स्पर्श (पुजारी द्वारा), शिवलिंग जलाभिषेक (कुछ में)।

संक्षिप्त उत्तर

गर्भगृह: सामान्य भक्त स्पर्श वर्जित — केवल दीक्षित पुजारी। कारण: चैतन्य शक्ति, पवित्रता, क्षति-रक्षा। अनुमति: चरण स्पर्श (पुजारी द्वारा), शिवलिंग जलाभिषेक (कुछ में)। दक्षिण भारत: कड़ा। उत्तर भारत: उदार। घर: स्पर्श अनुमत (शुद्ध हाथ)। मंदिर नियम पालन करें।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर में भगवान की मूर्ति को छूने के विषय में शास्त्रों और मंदिर परम्पराओं में स्पष्ट नियम हैं।

सामान्य नियम — प्रायः वर्जित:1. गर्भगृह में

आगम शास्त्र: गर्भगृह में स्थापित मूल विग्रह (मुख्य मूर्ति) को सामान्य भक्त स्पर्श नहीं कर सकते। केवल दीक्षित पुजारी/अर्चक ही मूर्ति को स्पर्श करते हैं — वह भी नित्य शुद्धि के बाद।

1कारण

  • ▸प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति = साक्षात् देवता — उसकी चैतन्य शक्ति अत्यन्त तीव्र
  • ▸अशुद्ध हाथों से स्पर्श = मूर्ति की पवित्रता प्रभावित
  • ▸बार-बार स्पर्श से मूर्ति क्षतिग्रस्त हो सकती है (विशेषतः पुरानी मूर्तियाँ)
  • ▸मंदिर की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए

2कहाँ स्पर्श की अनुमति

  • ▸चरण स्पर्श: कुछ मंदिरों में देवता के चरणों का स्पर्श कराया जाता है — पुजारी की अनुमति से
  • ▸उत्सव मूर्ति: कुछ दक्षिण भारतीय मंदिरों में उत्सव विग्रह (Processional Deity) के चरण स्पर्श का विधान
  • ▸शिवलिंग: कुछ मंदिरों में शिवलिंग पर स्वयं जल चढ़ाने की अनुमति (पुजारी की उपस्थिति में)

3मंदिर-विशिष्ट भिन्नताएँ

  • ▸दक्षिण भारतीय मंदिर: अत्यन्त कड़ा — गर्भगृह में प्रवेश भी वर्जित
  • ▸उत्तर भारतीय मंदिर: अपेक्षाकृत उदार — कुछ में मूर्ति स्पर्श/अभिषेक की अनुमति
  • ▸/वैष्णव: मूर्ति स्पर्श केवल पुजारी
  • ▸शिव मंदिर: शिवलिंग पर जल चढ़ाना प्रायः सबके लिए अनुमत

4घर की मूर्ति

घर की मूर्ति को स्पर्श करना, स्नान कराना, वस्त्र पहनाना — सब अनुमत और अनिवार्य (गृहस्थ पूजा का अंग)। शर्त: हाथ शुद्ध हों (स्नान/हाथ धोकर)।

सर्वोत्तम आचरण

मंदिर के नियमों का पालन करें। पुजारी से अनुमति लें। बिना अनुमति मूर्ति को कदापि स्पर्श न करें।

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3. कहाँ स्पर्श की अनुमति

- चरण स्पर्श: कुछ मंदिरों में देवता के चरणों का स्पर्श कराया जाता है — पुजारी की अनुमति से - उत्सव मूर्ति: कुछ दक्षिण भारतीय मंदिरों में उत्सव विग्रह (Processional Deity) के चरण स्पर्श का विधान - शिवलिंग: कुछ मंदिरों में शिवलिंग पर स्वयं जल चढ़ाने की अनुमति (पुजारी की उपस्थिति में)

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