विस्तृत उत्तर
मंदिर में भगवान की मूर्ति को छूने के विषय में शास्त्रों और मंदिर परम्पराओं में स्पष्ट नियम हैं।
सामान्य नियम — प्रायः वर्जित
1गर्भगृह में
आगम शास्त्र: गर्भगृह में स्थापित मूल विग्रह (मुख्य मूर्ति) को सामान्य भक्त स्पर्श नहीं कर सकते। केवल दीक्षित पुजारी/अर्चक ही मूर्ति को स्पर्श करते हैं — वह भी नित्य शुद्धि के बाद।
2कारण
- ▸प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति = साक्षात् देवता — उसकी चैतन्य शक्ति अत्यन्त तीव्र
- ▸अशुद्ध हाथों से स्पर्श = मूर्ति की पवित्रता प्रभावित
- ▸बार-बार स्पर्श से मूर्ति क्षतिग्रस्त हो सकती है (विशेषतः पुरानी मूर्तियाँ)
- ▸मंदिर की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए
3कहाँ स्पर्श की अनुमति
- ▸चरण स्पर्श: कुछ मंदिरों में देवता के चरणों का स्पर्श कराया जाता है — पुजारी की अनुमति से
- ▸उत्सव मूर्ति: कुछ दक्षिण भारतीय मंदिरों में उत्सव विग्रह (Processional Deity) के चरण स्पर्श का विधान
- ▸शिवलिंग: कुछ मंदिरों में शिवलिंग पर स्वयं जल चढ़ाने की अनुमति (पुजारी की उपस्थिति में)
4मंदिर-विशिष्ट भिन्नताएँ
- ▸दक्षिण भारतीय मंदिर: अत्यन्त कड़ा — गर्भगृह में प्रवेश भी वर्जित
- ▸उत्तर भारतीय मंदिर: अपेक्षाकृत उदार — कुछ में मूर्ति स्पर्श/अभिषेक की अनुमति
- ▸ISKCON/वैष्णव: मूर्ति स्पर्श केवल पुजारी
- ▸शिव मंदिर: शिवलिंग पर जल चढ़ाना प्रायः सबके लिए अनुमत
5घर की मूर्ति
घर की मूर्ति को स्पर्श करना, स्नान कराना, वस्त्र पहनाना — सब अनुमत और अनिवार्य (गृहस्थ पूजा का अंग)। शर्त: हाथ शुद्ध हों (स्नान/हाथ धोकर)।
सर्वोत्तम आचरण
मंदिर के नियमों का पालन करें। पुजारी से अनुमति लें। बिना अनुमति मूर्ति को कदापि स्पर्श न करें।





