ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
मंदिर नियम📜 भगवद्गीता (17.20-22), विष्णुपुराण, मनुस्मृति, धर्मसिन्धु, दानधर्म प्रकरण3 मिनट पठन

मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

गीता: सही स्थान-काल-पात्र + बिना प्रत्युपकार = सात्विक दान (श्रेष्ठ)। प्रकार: अन्न (सर्वोत्तम), धन (हुंडी), वस्त्र, गो-दान, तेल/घी। नियम: श्रद्धा, गोपनीयता, दाहिने हाथ से, सामर्थ्यानुसार। शुभ समय: एकादशी, संक्रांति, ग्रहण। दबाव/भय से दान = वर्जित।

📖

विस्तृत उत्तर

मंदिर में दान देना हिन्दू धर्म में अत्यन्त पुण्यदायक कर्म है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने दान के तीन प्रकार बताए हैं — सात्विक, राजसिक, और तामसिक।

दान का शास्त्रीय विधान

1सात्विक दान (सर्वश्रेष्ठ — गीता 17.20)

देशकालं च पात्रे च तद्दानं सात्विकं स्मृतम्।

— सही देश (स्थान), सही काल (समय), सही पात्र (योग्य व्यक्ति) को बिना किसी प्रत्युपकार की आशा से दिया गया दान = सात्विक।

2मंदिर में दान के प्रकार

  • अन्न दान: मंदिर की रसोई/भंडारे के लिए — सर्वश्रेष्ठ ('अन्नदानं परं दानम्')
  • धन दान: दान पेटी (हुंडी) में — मंदिर संचालन, गरीबों की सेवा
  • वस्त्र दान: देवता को वस्त्र अर्पित करना या गरीबों को
  • गो-दान: गाय दान — सर्वोच्च दान (ब्राह्मण/गौशाला को)
  • स्वर्ण/रजत दान: देवता को — उत्तम
  • तेल/घी दान: दीपक के लिए — प्रकाश दान
  • पुष्प/फल दान: पूजा सामग्री

3दान देने के नियम

  • श्रद्धा: बिना श्रद्धा का दान = व्यर्थ (गीता)
  • गोपनीय: दान का प्रचार न करें — 'दाहिना हाथ दे, बाएँ को पता न चले'
  • प्रत्युपकार रहित: बदले में कुछ न चाहें
  • अपमानरहित: दान लेने वाले का अपमान न करें
  • सामर्थ्य अनुसार: अपनी क्षमता के अनुसार — अत्यधिक न दें, न बहुत कम
  • दक्षिण हाथ से: दान सदा दाहिने हाथ से दें

4विशेष शुभ समय

  • एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
  • संक्रांति (मकर संक्रांति विशेष)
  • ग्रहण काल
  • सोमवती अमावस्या
  • श्राद्ध पक्ष
  • नवरात्रि, दीपावली, शिवरात्रि

5दान का फल (शास्त्रीय)

  • अन्न दान = पुण्य + स्वर्ग
  • विद्या दान = सर्वोत्तम ('विद्यादानं सर्वदानेषु श्रेष्ठम्')
  • गो-दान = पितृ तृप्ति
  • धन दान = लक्ष्मी कृपा

चेतावनी

  • दान किसी दबाव या भय से न दें (ठग तांत्रिकों से सावधान)
  • मंदिर की दान पेटी/हुंडी में ही दें — अनधिकृत व्यक्ति को नहीं
  • दान रसीद/प्रमाण लें (बड़ी राशि का)
  • तामसिक दान (अपमानपूर्वक, अयोग्य पात्र को) — गीता में निंदित
📜
शास्त्रीय स्रोत
भगवद्गीता (17.20-22), विष्णुपुराण, मनुस्मृति, धर्मसिन्धु, दानधर्म प्रकरण
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

दानमंदिर दानदान विधिश्रद्धासात्विक दान

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको मंदिर नियम से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर भगवद्गीता (17.20-22), विष्णुपुराण, मनुस्मृति, धर्मसिन्धु, दानधर्म प्रकरण पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।