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मंदिर में साष्टांग प्रणाम कैसे करें और कब करें?

साष्टांग = 8 अंग भूमि पर: दोनों पैर, घुटने, हथेलियाँ, छाती, मस्तक। विधि: खड़े → घुटने → हथेलियाँ → छाती+मस्तक → सम्पूर्ण शरीर।

संक्षिप्त उत्तर

साष्टांग = 8 अंग भूमि पर: दोनों पैर, घुटने, हथेलियाँ, छाती, मस्तक। विधि: खड़े → घुटने → हथेलियाँ → छाती+मस्तक → सम्पूर्ण शरीर। स्त्रियाँ: पंचांग (5 अंग) कुछ परम्पराओं में। कब: देवता/गुरु के सामने, तीर्थ, विशेष पूजा। भीड़ में सावधान। वृद्ध/गर्भवती: मानसिक प्रणाम।

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विस्तृत उत्तर

साष्टांग प्रणाम (अष्टांग प्रणिपात) सम्पूर्ण समर्पण का सर्वोच्च प्रकार है — शरीर के आठ अंगों से भूमि को स्पर्श करना।

'साष्टांग' का अर्थ

स (साथ) + अष्ट (आठ) + अंग = आठ अंगों सहित। शरीर के आठ अंग भूमि को स्पर्श करें:

  1. 1दोनों पैर (2)
  2. 2दोनों घुटने (2)
  3. 3दोनों हथेलियाँ (2)
  4. 4छाती/वक्ष (1)
  5. 5मस्तक/ललाट (1)

= कुल 8 अंग

विधि

1सामान्य विधि (पुरुषों के लिए)

  • ▸देवता की ओर मुख करके सीधे खड़े हों
  • ▸दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार करें
  • ▸फिर धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें
  • ▸पहले घुटने भूमि पर
  • ▸फिर हथेलियाँ भूमि पर (दोनों ओर फैलाकर)
  • ▸फिर छाती और मस्तक भूमि पर
  • ▸सम्पूर्ण शरीर भूमि पर सीधा लेट जाएँ — हाथ आगे की ओर फैले
  • ▸कुछ क्षण इसी स्थिति में रहें — मन में प्रार्थना/मंत्र
  • ▸फिर धीरे-धीरे उठें

2स्त्रियों के लिए (पंचांग प्रणाम)

कुछ परम्पराओं में स्त्रियों के लिए पंचांग प्रणाम (5 अंग) का विधान है — दोनों घुटने, दोनों हाथ, मस्तक। पूर्ण साष्टांग (पेट भूमि पर) स्त्रियों के लिए कुछ परम्पराओं में निषिद्ध (गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा हेतु)। अन्य परम्पराओं में स्त्री-पुरुष दोनों के लिए साष्टांग समान।

कब करें

  • ▸मंदिर में देवता के सामने (गर्भगृह के बाहर — भीड़ में सावधानी)
  • ▸गुरु के सामने
  • ▸ज्येष्ठ/वरिष्ठ व्यक्ति को
  • ▸तीर्थ स्थान पर प्रथम दर्शन
  • ▸विशेष पूजा/अनुष्ठान में

अन्य प्रणाम प्रकार (तुलना)

  • ▸नमस्कार — दोनों हाथ जोड़ना (सरलतम)
  • ▸चरण स्पर्श — पैर छूना
  • ▸शिरसा प्रणाम — मस्तक झुकाना
  • ▸साष्टांग — सम्पूर्ण शरीर भूमि पर (सर्वोच्च)
  • ▸दंडवत — लकड़ी के दंड (छड़ी) की भाँति सीधे लेटना = साष्टांग का पर्याय

सावधानी

  • ▸भीड़भाड़ वाले स्थान पर सावधानी से — अन्य भक्तों को बाधा न हो
  • ▸गर्भवती महिलाएँ — पंचांग प्रणाम करें
  • ▸वृद्ध/अस्वस्थ — मानसिक प्रणाम ही पर्याप्त
  • ▸शुद्ध भूमि पर ही करें — गंदी/गीली जगह न करें

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कब करें

- मंदिर में देवता के सामने (गर्भगृह के बाहर — भीड़ में सावधानी) - गुरु के सामने - ज्येष्ठ/वरिष्ठ व्यक्ति को - तीर्थ स्थान पर प्रथम दर्शन - विशेष पूजा/अनुष्ठान में

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