विस्तृत उत्तर
मंदिर में काले वस्त्र पहनने के विषय में विभिन्न मत और परम्पराएँ हैं।
काले वस्त्र अशुभ मानने के कारण
1पारम्परिक मान्यता
काला रंग = तमोगुण, शोक, नकारात्मकता का प्रतीक। मंदिर = सात्विक वातावरण। अतः तमोगुणी रंग वहाँ अनुचित।
2ज्योतिषीय दृष्टि
काला रंग = शनि/राहु। इन ग्रहों की ऊर्जा को मंदिर में लाना कुछ परम्पराओं में अशुभ माना जाता है।
3कुछ मंदिरों में निषेध
विष्णु/कृष्ण/राम मंदिरों में काले वस्त्र प्रायः अशुभ माने जाते हैं। कुछ दक्षिण भारतीय मंदिरों में कड़ा नियम।
काले वस्त्र — अपवाद और भिन्न मत
4शनि मंदिर
शनिदेव के मंदिर में काले वस्त्र शुभ माने जाते हैं — शनिवार को विशेष।
5शबरीमला (अय्यप्पा)
इस मंदिर में काले वस्त्र अनिवार्य हैं — यह 41 दिवसीय व्रत का भाग है।
6काली/भैरव मंदिर
कुछ शाक्त/तांत्रिक परम्पराओं में काला रंग शक्ति का प्रतीक — काली मंदिर में काले/गहरे रंग स्वीकार्य।
7नीला रंग
गहरा नीला (काले जैसा) कृष्ण से सम्बंधित होने के कारण कुछ परम्पराओं में शुभ माना जाता है।
व्यावहारिक दृष्टि
- ▸यदि आपके पास अन्य रंग के वस्त्र उपलब्ध हैं, तो काले से बचना उचित
- ▸परंतु यदि केवल काले वस्त्र हों, तो भक्ति-भाव से मंदिर जाना कहीं अधिक शुभ है बजाय न जाने के
- ▸मूल बात = भाव और स्वच्छता, रंग गौण है
निष्कर्ष
काले वस्त्र अधिकांश मंदिरों में 'अनुशंसित नहीं' की श्रेणी में आते हैं, परंतु 'पूर्णतः वर्जित' नहीं (शनि/अय्यप्पा मंदिर अपवाद)। सर्वोत्तम = सफेद, पीला, लाल।





