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शिव पूजा📜 कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 4.5), शिव पुराण, आगम शास्त्र1 मिनट पठन

रुद्राभिषेक क्या होता है?

संक्षिप्त उत्तर

रुद्राभिषेक = रुद्र (शिव) + अभिषेक + वैदिक मंत्र-पाठ। मूल: तैत्तिरीय संहिता (4.5) — श्री रुद्रम् (नमकम्) + चमकम्। नमकम् = 11 अनुवाक — 108 रूपों की स्तुति। चमकम् = 346 वर-प्रार्थना। सबसे शक्तिशाली वैदिक शिव-पूजा।

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विस्तृत उत्तर

रुद्राभिषेक हिंदू धर्म की सर्वाधिक पवित्र और शक्तिशाली वैदिक पूजा-विधि है।

परिभाषा

रुद्राभिषेक = रुद्र (भगवान शिव का वैदिक नाम) + अभिषेक (जल/पंचामृत से स्नान कराना) + वैदिक मंत्र-पाठ।

रुद्राभिषेक का मूल

कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (4.5) में 'श्री रुद्रम्' (शतरुद्रिय) और उसके बाद 'श्री चमकम्' (अनुवाक) का पाठ — यही रुद्राभिषेक का वैदिक आधार है।

श्री रुद्रम् की संरचना

  • नमकम् (11 अनुवाक) — रुद्र के 108 रूपों की स्तुति, विनम्र प्रार्थना और 'नमः' की आवृत्ति
  • चमकम् (11 अनुवाक) — 'च मे' (और मुझे यह दो) — 346 वस्तुओं की प्रार्थना

रुद्राभिषेक बनाम साधारण जलाभिषेक

| विषय | जलाभिषेक | रुद्राभिषेक |

|------|-----------|-------------|

| मंत्र | पंचाक्षरी | श्री रुद्रम् (वैदिक) |

| समय | 15-30 मिनट | 1-3 घंटे |

| पात्रता | सभी | विद्वान पुरोहित |

| फल | पाप-नाश | सर्व-कामना-सिद्धि |

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शास्त्रीय स्रोत
कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 4.5), शिव पुराण, आगम शास्त्र
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