विस्तृत उत्तर
रुद्राभिषेक और लघुरुद्र दोनों शिव पूजा की विधियां हैं, किन्तु इनके स्तर और विस्तार में महत्वपूर्ण अंतर है:
रुद्राभिषेक (एकादशिनी/रुद्री)
रुद्राष्टाध्यायी के पांचवें अध्याय (नमकम्/शतरुद्रीय) की 11 आवृत्तियां और शेष अध्यायों की एक-एक आवृत्ति = एक 'रुद्री' या 'एकादशिनी'। इसे सामान्य रुद्राभिषेक कहा जाता है। एक पुरोहित एक बैठक में संपन्न कर सकता है।
लघुरुद्र
एकादशिनी रुद्री की 11 आवृत्तियां = 1 लघुरुद्र। अर्थात् रुद्राध्याय के कुल 121 पाठ (11 × 11) = लघुरुद्र।
तुलना
| विषय | रुद्राभिषेक (रुद्री) | लघुरुद्र |
|-------|---------------------|----------|
| रुद्राध्याय पाठ | 11 आवृत्ति | 121 आवृत्ति (11 × 11) |
| समय | 1.5-3 घंटे | 1-11 दिन |
| पुरोहित | 1 पर्याप्त | 1 (11 दिन) या 11 (1 दिन) |
| स्तर | प्राथमिक | मध्यम |
| फल | दुःख नाश, मनोकामना | मुक्ति/मोक्ष प्राप्ति |
| अवसर | सोमवार, शिवरात्रि | विशेष संकल्प, कष्ट निवारण |
आगे के स्तर
- ▸महारुद्र = 11 लघुरुद्र = 1,331 रुद्राध्याय पाठ
- ▸अतिरुद्र = 11 महारुद्र = 14,641 रुद्राध्याय पाठ
लघुरुद्र की विशेषता
लघुरुद्र एक ब्राह्मण द्वारा 11 दिनों में (प्रतिदिन एक एकादशिनी) या 11 ब्राह्मणों द्वारा एक ही दिन में संपन्न किया जा सकता है। इससे साधक मुक्ति प्राप्त करता है।




