विस्तृत उत्तर
रुद्राभिषेक की विधि कृष्ण यजुर्वेद के श्री रुद्रम् और शिव पुराण में वर्णित है:
रुद्राभिषेक क्या है
श्री रुद्रम् का पाठ करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करना 'रुद्राभिषेक' है। यह शिव पूजा का सर्वोच्च अनुष्ठान है।
श्री रुद्रम् की संरचना
- ▸नमकम् — 11 अनुवाक (शिव की स्तुति और नमस्कार)
- ▸चमकम् — 11 अनुवाक (वरदान की प्रार्थना)
- ▸एक पूर्ण पाठ = एकादश रुद्री
- ▸11 पाठ = एकादश रुद्री × 11 = लघुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक के प्रकार
- 1जलाभिषेक — जल से; सामान्य और सर्वसुलभ
- 2दुग्धाभिषेक — दूध से; पुत्र प्राप्ति और रोग नाश
- 3पंचामृत अभिषेक — पाँच अमृतों से; सर्वकामना
- 4घृताभिषेक — घी से; समृद्धि
- 5मधुराभिषेक — शहद से; मधुर वाणी
- 6शर्करा अभिषेक — शक्कर से; सुख
- 7नवग्रह अभिषेक — नौ वस्तुओं से
रुद्राभिषेक की क्रमिक विधि
1संकल्प
गोत्र, नाम और अभिषेक का उद्देश्य बोलें।
2गणेश पूजन
कोई भी अनुष्ठान गणेश वंदना से आरंभ।
3कलश स्थापना
तांबे या पीतल के कलश में गंगाजल भरें। कलश पर आम के पत्ते, नारियल रखें।
4श्री रुद्रम् पाठ
नमकम् और चमकम् का पाठ करते हुए प्रत्येक अनुवाक पर अभिषेक सामग्री चढ़ाएं।
5एकादश रुद्री
11 पुरोहितों द्वारा एक साथ 11 पाठ — यह महारुद्राभिषेक है।
6हवन
रुद्राभिषेक के बाद रुद्र हवन करें — 'ॐ नमः शिवाय स्वाहा'
7पुष्पांजलि और आरती
रुद्राभिषेक के फल (श्री रुद्रम् के अनुसार)
जल से — वर्षा और समृद्धि; दूध से — पुत्र लाभ; घी से — आयु और ज्ञान; शहद से — वाक्सिद्धि।





