विस्तृत उत्तर
साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
यह नियम नाग-पूजा और कालसर्प शांति की साधना के लिए सामान्य नियमों में वर्णित है।
नाग मंत्र जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
यह नियम नाग-पूजा और कालसर्प शांति की साधना के लिए सामान्य नियमों में वर्णित है।
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