विस्तृत उत्तर
पूजा के दौरान जप के लिए मंत्र-चयन शास्त्रों में अत्यंत व्यावहारिक रूप से वर्णित है:
मूल सिद्धांत — मनुस्मृति (2.78-79)
गुरु से दीक्षित मंत्र सर्वश्रेष्ठ है। यदि दीक्षा न हो, तो इष्टदेव का सिद्ध और शास्त्रोक्त नाम-मंत्र जपें।
देवता-अनुसार जप के लिए उपयुक्त मंत्र
भगवान विष्णु / श्रीकृष्ण के लिए
- ▸'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (द्वादशाक्षर मंत्र) — भागवत पुराण और पाञ्चरात्र आगम में प्रमाणित। सर्वसुलभ और अत्यंत शक्तिशाली।
- ▸हरे कृष्ण महामंत्र — भागवत (6.3.22): कलियुग में महामंत्र-जप सर्वोत्तम।
- ▸'ॐ नमो नारायणाय' (अष्टाक्षर) — वैष्णव परंपरा का मूल मंत्र।
भगवान शिव के लिए
- ▸'ॐ नमः शिवाय' (पञ्चाक्षर/षडाक्षर) — शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता) में सर्वश्रेष्ठ।
- ▸महामृत्युंजय मंत्र — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (यजुर्वेद 3.60) — रोग, मृत्यु-भय, और संकट-निवारण के लिए।
देवी के लिए
- ▸नवार्ण मंत्र — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (देवीभागवत) — दुर्गा पूजा में मूल मंत्र।
- ▸'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — लक्ष्मी पूजा के लिए।
गणपति के लिए
- ▸'ॐ गं गणपतये नमः' — सर्वसुलभ और प्रभावशाली।
- ▸'ॐ गणेशाय नमः'
सूर्य देव के लिए
- ▸गायत्री मंत्र — 'ॐ भूर्भुवः स्वः...' (ऋग्वेद 3.62.10) — सूर्य के लिए और सार्वभौम।
जप की विधि (शास्त्रोक्त)
- 1माला का उपयोग: 108 मनकों की माला — एक माला = 108 जप। माला को मध्यमा और अनामिका उंगली से फेरें, तर्जनी से स्पर्श न करें।
- 2गति: न बहुत तेज (यांत्रिक), न बहुत धीमी (सुस्त) — मध्यम गति से भाव के साथ।
- 3मानस जप श्रेष्ठ: मन में जप (उपांशु या मानस) — जोर से बोलने से कम प्रभावशाली नहीं, बल्कि अधिक।
- 4नित्यता: नित्य एक निश्चित संख्या — 108, 1008, या 3 माला — अनुशासन से जपें।
भागवत (6.3.22) का निर्देश
तस्माद् वर्णात्मकं ब्रह्म नित्यं जप्यं विजानता।
— ज्ञानी पुरुष को नित्य मंत्र-जप करना चाहिए।





