ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
मंदिर पूजा📜 भागवत पुराण (6.3.22), मनुस्मृति (2.78-79), जाबालोपनिषद, शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता), यजुर्वेद (3.60), ललितासहस्रनाम2 मिनट पठन

मंदिर में पूजा के दौरान कौन सा मंत्र जपें?

संक्षिप्त उत्तर

विष्णु: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', हरे कृष्ण महामंत्र। शिव: 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय। देवी: नवार्ण मंत्र। गणपति: 'ॐ गं गणपतये नमः'। सूर्य/सार्वभौम: गायत्री। जप विधि: 108 मनकों की माला, मध्यम गति, मानस जप श्रेष्ठ, नित्य निश्चित संख्या।

📖

विस्तृत उत्तर

पूजा के दौरान जप के लिए मंत्र-चयन शास्त्रों में अत्यंत व्यावहारिक रूप से वर्णित है:

मूल सिद्धांत — मनुस्मृति (2.78-79)

गुरु से दीक्षित मंत्र सर्वश्रेष्ठ है। यदि दीक्षा न हो, तो इष्टदेव का सिद्ध और शास्त्रोक्त नाम-मंत्र जपें।

देवता-अनुसार जप के लिए उपयुक्त मंत्र

भगवान विष्णु / श्रीकृष्ण के लिए

  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (द्वादशाक्षर मंत्र) — भागवत पुराण और पाञ्चरात्र आगम में प्रमाणित। सर्वसुलभ और अत्यंत शक्तिशाली।
  • हरे कृष्ण महामंत्र — भागवत (6.3.22): कलियुग में महामंत्र-जप सर्वोत्तम।
  • 'ॐ नमो नारायणाय' (अष्टाक्षर) — वैष्णव परंपरा का मूल मंत्र।

भगवान शिव के लिए

  • 'ॐ नमः शिवाय' (पञ्चाक्षर/षडाक्षर) — शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता) में सर्वश्रेष्ठ।
  • महामृत्युंजय मंत्र — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (यजुर्वेद 3.60) — रोग, मृत्यु-भय, और संकट-निवारण के लिए।

देवी के लिए

  • नवार्ण मंत्र — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (देवीभागवत) — दुर्गा पूजा में मूल मंत्र।
  • 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — लक्ष्मी पूजा के लिए।

गणपति के लिए

  • 'ॐ गं गणपतये नमः' — सर्वसुलभ और प्रभावशाली।
  • 'ॐ गणेशाय नमः'

सूर्य देव के लिए

  • गायत्री मंत्र — 'ॐ भूर्भुवः स्वः...' (ऋग्वेद 3.62.10) — सूर्य के लिए और सार्वभौम।

जप की विधि (शास्त्रोक्त)

  1. 1माला का उपयोग: 108 मनकों की माला — एक माला = 108 जप। माला को मध्यमा और अनामिका उंगली से फेरें, तर्जनी से स्पर्श न करें।
  2. 2गति: न बहुत तेज (यांत्रिक), न बहुत धीमी (सुस्त) — मध्यम गति से भाव के साथ।
  3. 3मानस जप श्रेष्ठ: मन में जप (उपांशु या मानस) — जोर से बोलने से कम प्रभावशाली नहीं, बल्कि अधिक।
  4. 4नित्यता: नित्य एक निश्चित संख्या — 108, 1008, या 3 माला — अनुशासन से जपें।

भागवत (6.3.22) का निर्देश

तस्माद् वर्णात्मकं ब्रह्म नित्यं जप्यं विजानता।

— ज्ञानी पुरुष को नित्य मंत्र-जप करना चाहिए।

📜
शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (6.3.22), मनुस्मृति (2.78-79), जाबालोपनिषद, शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता), यजुर्वेद (3.60), ललितासहस्रनाम
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

मंत्र जपजप विधिइष्टदेव मंत्रपूजा मंत्र

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मंदिर में पूजा के दौरान कौन सा मंत्र जपें — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको मंदिर पूजा से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर भागवत पुराण (6.3.22), मनुस्मृति (2.78-79), जाबालोपनिषद, शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता), यजुर्वेद (3.60), ललितासहस्रनाम पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।