विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में कोई एक 'सर्वश्रेष्ठ' मंत्र नहीं बताया गया — विभिन्न परंपराओं में विभिन्न मंत्रों को सर्वोच्च माना गया है। यहाँ प्रमुख मंत्रों का शास्त्राधार:
1गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3.62.10) — 'सर्व मंत्राणां जननी'
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।
— वेद माता। बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए। मनुस्मृति: ब्रह्मचारी और गृहस्थ दोनों के लिए अनिवार्य।
2पंचाक्षर मंत्र — 'ॐ नमः शिवाय' (शिवपुराण)
शिवपुराण: यह पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतिनिधि मंत्र है। शिव-भक्तों के लिए सर्वोच्च।
3अष्टाक्षर मंत्र — 'ॐ नमो नारायणाय' (विष्णु पुराण)
विष्णु-परंपरा का मूल मंत्र। रामानुज संप्रदाय में 'तिरुवष्टाक्षर' के नाम से पूजित।
4हरे कृष्ण महामंत्र (भागवत पुराण 6.3.22)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।
— कलियुग के लिए सर्वोत्तम (भागवत, ब्रह्मवैवर्त पुराण)। महामंत्र कहलाता है।
5महामृत्युंजय मंत्र (यजुर्वेद 3.60)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
— रोग, भय, मृत्यु-भय निवारण के लिए। शिव-पूजा में विशेष।
6देवी नवार्ण मंत्र — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (देवीभागवत)
देवी साधना का मूल मंत्र।
निष्कर्ष
सर्वश्रेष्ठ मंत्र वह है जो साधक के इष्टदेवता का हो और जिसे गुरुमुखी रूप से (गुरु से दीक्षित होकर) जपा जाए।





