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मंदिर पूजा📜 आगम शास्त्र, वैखानस आगम, पाञ्चरात्र आगम, मंदिर नित्य सेवा विधान2 मिनट पठन

मंदिर में भगवान के वस्त्र बदलने का क्या नियम है?

संक्षिप्त उत्तर

दैनिक 2-3 बार: प्रातः (सादे) → श्रृंगार (भव्य) → शयन (हल्के)। रेशम = सर्वोत्तम। रंग: विष्णु=पीला, शिव=श्वेत/भगवा, देवी=लाल। ऋतु अनुसार (ग्रीष्म=हल्के, शीत=ऊनी)। केवल दीक्षित पुजारी। पुराने वस्त्र = निर्माल्य (भक्तों को प्रसाद)। घर: साप्ताहिक/त्योहार पर।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर में देवता के वस्त्र बदलना (वस्त्र परिवर्तन/अलंकार) नित्य पूजा का महत्वपूर्ण अंग है। देवता को सगुण रूप में जीवित व्यक्ति की भाँति सेवा दी जाती है।

वस्त्र परिवर्तन के नियम

1दैनिक वस्त्र परिवर्तन

प्रमुख मंदिरों में दिन में कम से कम 2-3 बार वस्त्र बदले जाते हैं:

  • प्रातः — शुद्ध/सादे वस्त्र (स्नान के बाद)
  • श्रृंगार — भव्य वस्त्र + आभूषण (दर्शन के लिए)
  • शयन — हल्के/आरामदायक वस्त्र (रात्रि)

2वस्त्र सामग्री

  • रेशम (Silk) — सर्वोत्तम
  • सूती (Cotton) — शुभ
  • जरी, जरदोजी — अलंकरण के लिए
  • कृत्रिम/सिंथेटिक — अनुशंसित नहीं

3रंग नियम (देवता अनुसार)

  • विष्णु/कृष्ण: पीला (पीताम्बर) प्रधान
  • शिव: श्वेत, भगवा, बाघम्बर
  • देवी: लाल, गुलाबी, हरा
  • गणेश: लाल, पीला
  • हनुमान: लाल, केसरिया

4ऋतु अनुसार

  • ग्रीष्म: हल्के, पतले, सूती वस्त्र — शीतलता
  • शीत: ऊनी शाल, गरम वस्त्र — देवता को ठंड से बचाना
  • वर्षा: जल-प्रतिरोधी/जल्दी सूखने वाले

5विशेष अवसर

  • उत्सवों/त्योहारों पर विशेष भव्य वस्त्र
  • जन्माष्टमी पर कृष्ण को मोर पंख + पीताम्बर
  • शिवरात्रि पर शिव को रुद्राक्ष + भस्म
  • नवरात्रि पर देवी को प्रतिदिन भिन्न रंग

6कौन बदल सकता है

  • केवल दीक्षित पुजारी/अर्चक
  • स्नान और शुद्धि के बाद ही
  • विशिष्ट मंत्रों के साथ

7पुराने वस्त्र

  • देवता के पुराने वस्त्र 'निर्माल्य' कहलाते हैं
  • इन्हें भक्तों में प्रसाद रूप में वितरित (अत्यन्त शुभ)
  • कुछ मंदिरों में जल में विसर्जन

गृह मंदिर

घर में भी मूर्ति को नियमित वस्त्र बदलने चाहिए — साप्ताहिक या त्योहारों पर। छोटी मूर्ति पर छोटे वस्त्र = शुभ।

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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र, वैखानस आगम, पाञ्चरात्र आगम, मंदिर नित्य सेवा विधान
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