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मंदिर पूजा📜 आगम शास्त्र, विष्णुपुराण, शिवपुराण, धर्मसिन्धु, मंदिर परम्परा3 मिनट पठन

मंदिर में भगवान को भोग कैसे लगाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

भोग विधि: शुद्ध सात्विक सामग्री → सजी थाली + तुलसी पत्ता → देवता के सामने रखें → नैवेद्य मंत्र (पंचप्राण) → जल छिड़कें → 5-15 मिनट रखें → प्रसाद वितरण। दैनिक: बाल भोग (प्रातः), राजभोग (दोपहर), संध्या, शयन। 56 भोग = विशेष (कृष्ण)। बासी/जूठा वर्जित। भगवान पहले।

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विस्तृत उत्तर

भगवान को भोग (नैवेद्य) लगाना हिन्दू पूजा का अभिन्न अंग है। यह देवता को भोजन अर्पित करने की विधि है।

भोग लगाने की विधि

1भोग तैयारी

  • शुद्ध सात्विक सामग्री — प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा वर्जित
  • रसोई में स्वच्छता और पवित्रता
  • भोजन बनाते समय मंत्र जप या भगवान का स्मरण
  • चखकर न बनाएँ — भगवान को पहले अर्पित

2भोग थाली सजाना

  • स्वच्छ पात्र (थाली/कटोरी) — ताँबा, पीतल, चाँदी उत्तम
  • भोजन सजाकर रखें — जैसे किसी सम्मानित अतिथि के लिए
  • तुलसी पत्ता (विष्णु) या बिल्वपत्र (शिव) रखना शुभ

3अर्पण विधि

  • भोग थाली देवता के सामने रखें
  • ढक्कन/कपड़े से ढकें (कुछ परम्पराओं में)
  • हाथ जोड़कर प्रार्थना: 'हे भगवान, यह भोग स्वीकार करें'
  • नैवेद्य मंत्र:

'ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा,

ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा, ॐ ब्रह्मणे स्वाहा'

(पंचप्राण को अर्पित — शास्त्रीय विधि)

  • जल छिड़कें (अभिषेक) — भोग के चारों ओर
  • 5-15 मिनट भोग अर्पित रखें (भगवान 'ग्रहण' करें)
  • फिर भोग उतारकर प्रसाद के रूप में वितरित

4भोग के समय

मंदिरों में दिन में कई बार भोग:

  • बाल भोग (प्रातः — हल्का — दूध, मिठाई)
  • राजभोग (मध्याह्न — मुख्य भोजन — सम्पूर्ण थाली)
  • संध्या भोग (सायंकाल — फल, मिठाई)
  • शयन भोग (रात्रि — दूध, पान)

5भोग की सामग्री (सामान्य)

  • चावल/रोटी, दाल, सब्जी, मिठाई, फल, दूध
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • जल (शुद्ध/गंगाजल)

6विशेष — 56 भोग (छप्पन भोग)

कृष्ण मंदिरों में विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। पौराणिक कथा: इन्द्र ने गोवर्धन पूजा के बाद कृष्ण को 56 भोग अर्पित किए।

महत्वपूर्ण नियम

  • भोग लगाने से पहले स्वयं न खाएँ — 'भगवान पहले'
  • बासी, जूठा, या अशुद्ध भोजन कभी न चढ़ाएँ
  • भोग के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र, विष्णुपुराण, शिवपुराण, धर्मसिन्धु, मंदिर परम्परा
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