विस्तृत उत्तर
भगवान को भोग (नैवेद्य) लगाना हिन्दू पूजा का अभिन्न अंग है। यह देवता को भोजन अर्पित करने की विधि है।
भोग लगाने की विधि
1भोग तैयारी
- ▸शुद्ध सात्विक सामग्री — प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा वर्जित
- ▸रसोई में स्वच्छता और पवित्रता
- ▸भोजन बनाते समय मंत्र जप या भगवान का स्मरण
- ▸चखकर न बनाएँ — भगवान को पहले अर्पित
2भोग थाली सजाना
- ▸स्वच्छ पात्र (थाली/कटोरी) — ताँबा, पीतल, चाँदी उत्तम
- ▸भोजन सजाकर रखें — जैसे किसी सम्मानित अतिथि के लिए
- ▸तुलसी पत्ता (विष्णु) या बिल्वपत्र (शिव) रखना शुभ
3अर्पण विधि
- ▸भोग थाली देवता के सामने रखें
- ▸ढक्कन/कपड़े से ढकें (कुछ परम्पराओं में)
- ▸हाथ जोड़कर प्रार्थना: 'हे भगवान, यह भोग स्वीकार करें'
- ▸नैवेद्य मंत्र:
'ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा,
ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा, ॐ ब्रह्मणे स्वाहा'
(पंचप्राण को अर्पित — शास्त्रीय विधि)
- ▸जल छिड़कें (अभिषेक) — भोग के चारों ओर
- ▸5-15 मिनट भोग अर्पित रखें (भगवान 'ग्रहण' करें)
- ▸फिर भोग उतारकर प्रसाद के रूप में वितरित
4भोग के समय
मंदिरों में दिन में कई बार भोग:
- ▸बाल भोग (प्रातः — हल्का — दूध, मिठाई)
- ▸राजभोग (मध्याह्न — मुख्य भोजन — सम्पूर्ण थाली)
- ▸संध्या भोग (सायंकाल — फल, मिठाई)
- ▸शयन भोग (रात्रि — दूध, पान)
5भोग की सामग्री (सामान्य)
- ▸चावल/रोटी, दाल, सब्जी, मिठाई, फल, दूध
- ▸पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- ▸जल (शुद्ध/गंगाजल)
6विशेष — 56 भोग (छप्पन भोग)
कृष्ण मंदिरों में विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। पौराणिक कथा: इन्द्र ने गोवर्धन पूजा के बाद कृष्ण को 56 भोग अर्पित किए।
महत्वपूर्ण नियम
- ▸भोग लगाने से पहले स्वयं न खाएँ — 'भगवान पहले'
- ▸बासी, जूठा, या अशुद्ध भोजन कभी न चढ़ाएँ
- ▸भोग के बाद प्रसाद सबमें बाँटें





