भोग विधि: शुद्ध सात्विक सामग्री → सजी थाली + तुलसी पत्ता → देवता के सामने रखें → नैवेद्य मंत्र (पंचप्राण) → जल छिड़कें → 5-15 मिनट रखें → प्रसाद वितरण। दैनिक: बाल भोग (प्रातः), राजभोग (दोपहर), संध्या, शयन। 56 भोग = विशेष (कृष्ण)। बासी/जूठा वर्जित। भगवान पहले।
- 1शुद्ध सात्विक सामग्री — प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा वर्जित
- 2रसोई में स्वच्छता और पवित्रता
- 3भोजन बनाते समय मंत्र जप या भगवान का स्मरण
- 4चखकर न बनाएँ — भगवान को पहले अर्पित
- 5स्वच्छ पात्र (थाली/कटोरी) — ताँबा, पीतल, चाँदी उत्तम
- 6भोजन सजाकर रखें — जैसे किसी सम्मानित अतिथि के लिए
- 7तुलसी पत्ता (विष्णु) या बिल्वपत्र (शिव) रखना शुभ
- 8भोग थाली देवता के सामने रखें
- 9ढक्कन/कपड़े से ढकें (कुछ परम्पराओं में)
- 10हाथ जोड़कर प्रार्थना: 'हे भगवान, यह भोग स्वीकार करें'
- 11नैवेद्य मंत्र:
- 12जल छिड़कें (अभिषेक) — भोग के चारों ओर
- 135-15 मिनट भोग अर्पित रखें (भगवान 'ग्रहण' करें)
- 14फिर भोग उतारकर प्रसाद के रूप में वितरित
- 15बाल भोग (प्रातः — हल्का — दूध, मिठाई)
- 16राजभोग (मध्याह्न — मुख्य भोजन — सम्पूर्ण थाली)
- 17संध्या भोग (सायंकाल — फल, मिठाई)
- 18शयन भोग (रात्रि — दूध, पान)
- 19चावल/रोटी, दाल, सब्जी, मिठाई, फल, दूध
- 20पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- 21जल (शुद्ध/गंगाजल)
- 22भोग लगाने से पहले स्वयं न खाएँ — 'भगवान पहले'
- 23बासी, जूठा, या अशुद्ध भोजन कभी न चढ़ाएँ
- 24भोग के बाद प्रसाद सबमें बाँटें